Mathura Wedding Controversy: मथुरा के नरहौली कांड पर गरमाई राजनीति, पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रवक्ता कुँवर सिंह निषाद हाउस अरेस्ट

Dalit wedding controversy Mathura: मथुरा के नरहौली गांव में दलित कन्या के विवाह में कथित पथराव की घटना के बाद कांग्रेस नेता कुँवर सिंह निषाद को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से पहले हाउस अरेस्ट किया गया. कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए प्रशासन पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है.

Mathura News

Newzo

• 01:45 PM • 26 May 2026

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 Mathura Narhauli Case: जनपद मथुरा के नरहौली गांव में दलित कन्या के विवाह समारोह में कथित पथराव की घटना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है. घटना की वस्तुस्थिति जानने और पीड़ित परिवार से मिलने के लिए रवाना हो रहे कांग्रेस प्रवक्ता कुँवर सिंह निषाद को पुलिस प्रशासन द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है.

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कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कड़ी नाराज़गी जताई है. उनका कहना है कि विपक्ष की आवाज़ दबाने और सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.

जनता की आवाज़ को नहीं दबाया जा सकता-कुँवर सिंह निषाद


कांग्रेस प्रवक्ता कुँवर सिंह निषाद ने कहा कि वह केवल पीड़ित परिवार से मिलकर घटना की सच्चाई जानना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दलित समाज से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाने के बजाय विपक्ष को रोकने का काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ उठाना अपराध नहीं है और न्याय की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.

नरहौली गांव की घटना से बढ़ा तनाव


बताया जा रहा है कि मथुरा के नरहौली गांव में दलित परिवार की शादी के दौरान पथराव की घटना हुई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. घटना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

विपक्ष ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप


कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय विपक्षी नेताओं को रोकने में जुटा है. पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को ही पीड़ितों से मिलने नहीं दिया जाएगा, तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होगी.

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है और सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.