अखिलेश यादव के सामने ही भिड़ गए 2 सपा नेता, बैठक में तीखी बहस के बाद हुआ बड़ा एक्शन

यूपी तक

• 12:28 PM • 21 Sep 2026

SP Leaders Clash: लखनऊ में सपा की 2027 चुनावी बैठक के दौरान अखिलेश यादव के सामने एटा और कासगंज के नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई. विवाद के बाद पार्टी ने दोनों जिलों की पूरी जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया.

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SP Leaders Clash: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में भारी हंगामा देखने को मिला. लखनऊ में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को घेरने की रणनीति बनाना था, लेकिन चर्चा के बीच पार्टी के ही दो बड़े नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई. एटा और कासगंज के नेताओं के बीच हुए इस विवाद के बाद पार्टी नेतृत्व ने सख्त कदम उठाते हुए बड़ा फैसला लिया है. अखिलेश यादव के सामने हुए इस हंगामे के चलते एटा और कासगंज जिलों की पूरी समाजवादी पार्टी की कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है.

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अखिलेश के सामने भिड़े सपा नेता

लखनऊ में चल रही इस बैठक में अखिलेश यादव के सामने ही एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र सिंह यादव और पूर्व विधान परिषद अध्यक्ष रमेश यादव के भतीजे मनजीत यादव के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे शब्दों में हमला करना शुरू कर दिया. वहां मौजूद अन्य नेताओं के सामने यह घटनाक्रम काफी हैरान करने वाला था. अखिलेश यादव ने इस विवाद पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिनके पास ज्यादा पैसा आ जाता है, वे अपनी मर्जी से काम करने लगते हैं और पार्टी का कहना नहीं मानते हैं.

पार्टी ने भंग की जिला कार्यकारिणी

इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है. सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से एटा और कासगंज जिलों की पूरी संगठनात्मक टीम को तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया गया है. इन दोनों जिलों के अध्यक्षों के अलावा सभी फ्रंटल संगठनों और कार्यकारिणी सदस्यों को उनके पदों से हटा दिया गया है. पार्टी का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि वह अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी.

बीजेपी के गढ़ में आपसी लड़ाई

एटा और कासगंज दोनों ही जिले इस समय भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं. एटा की चारों विधानसभा सीटों पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है, जबकि कासगंज की तीन सीटें बीजेपी के पास हैं और एक सीट पर सपा का कब्जा है. पार्टी के लिए 2027 के चुनाव में इन सीटों पर जीत दर्ज करना पहले से ही एक बड़ी चुनौती है. ऐसे में नेताओं की आपसी खींचतान ने सपा नेतृत्व की चिंताएं और बढ़ा दी हैं. अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर चुनाव से पहले ही पार्टी के नेता आपस में लड़ेंगे, तो वे बीजेपी का मुकाबला कैसे कर पाएंगे.