उत्तर प्रदेश में पुलिस बल की मजबूती, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशिक्षण क्षमताओं के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ताजा बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिससे राज्य के योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिल सके.
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पेपर लीक करने वालों पर कठोर कानून: आजीवन कारावास का प्रावधान
2017 से पहले की स्थितियों का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पहले प्रदेश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी थी. अब पुलिस बल की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है. इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाने वालों पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून बनाया गया है. नए नियमों के तहत पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा और उनकी संपत्ति जब्त करने का कड़ा प्रावधान किया गया है.
कोर्ट स्टे से नहीं रुकेगी भर्ती, घूसखोरी व भाई-भतीजावाद खत्म
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि न्यायालय से मिलने वाले स्टे के कारण भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भर्ती व्यवस्था से घूसखोरी और भाई-भतीजावाद की प्रथा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से अब केवल योग्य अभ्यर्थियों को ही पुलिस सेवा में आने का अवसर मिल रहा है.
ट्रेनिंग क्षमता 6,000 से बढ़कर हुई 60,000
पुलिस बल को आधुनिक और सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षण ढांचे (Training Infrastructure) में ऐतिहासिक सुधार किया गया है. प्रदेश में पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग क्षमता को 6,000 से बढ़ाकर सीधे 60,000 कर दिया गया है, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में नए रंगरूटों को प्रशिक्षित किया जा सके.
इसके अलावा, पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है. राज्य में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या अब बढ़कर 44,000 से अधिक हो चुकी है और इसमें लगातार बढ़ोतरी की जा रही है.
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