लखनऊ के गोमतीनगर में ICICI बैंक की डिप्टी मैनेजर दिव्या मिश्रा की हत्या के बाद उनकी बहन प्रज्ञा मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखी है. पोस्ट में प्रज्ञा ने बताया कि दिव्या अपने पति से अलग होना चाहती थीं और लंबे समय से उसके व्यवहार से परेशान थीं.
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प्रज्ञा ने यह भी लिखा कि हत्या के बाद आरोपी ने स्टेटस में उनका नाम लिखकर कहा था कि ‘मुझे सब पता था.’ प्रज्ञा का कहना है कि हां, उन्हें पता था कि उनकी बहन के साथ कथित तौर पर क्रूरता होती थी, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना खौफनाक मोड़ ले लेगा.
इस पोस्ट में प्रज्ञा ने दिव्या के साथ कथित प्रताड़ना से लेकर बैंक के बाहर मिले CCTV फुटेज और आरोपी के हथियारों तक कई सवाल उठाए हैं.
‘हां, मुझे पता था कि मेरी बहन के साथ क्रूरता होती थी’
प्रज्ञा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि दिव्या ने उन्हें बताया था कि उसका पति ‘साइको’ था. प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या उससे अलग होना चाहती थी. उन्होंने लिखा कि उन्हें अपनी बहन की बताई हुई बातें पता थीं, लेकिन इतना बड़ा अपराध हो जाएगा, इसका अंदाजा नहीं था.
प्रज्ञा ने एक उदाहरण देते हुए लिखा कि अगर ब्लिंकिट से मंगाए गए टमाटरों में कोई टमाटर खराब निकल जाता था तो आरोपी कथित तौर पर दिव्या को कहकर पीटता था कि उसने खराब टमाटर कैसे मंगवा दिया.
प्रज्ञा ने यह भी दावा किया कि आरोपी और उसकी बहन ने मिलकर अपनी मां के साथ भी मारपीट की थी. प्रज्ञा के मुताबिक, आरोपी की मां बीमार थीं और बाद में उनका निधन हो गया.
‘इतना सब होने के बाद भी तीज का व्रत रखने वाली थी’
प्रज्ञा ने अपनी पोस्ट में दिव्या के भावनात्मक पक्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि इतना सब होने के बावजूद दिव्या तीज का व्रत रखने वाली थी.
प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या ने अपने हाथ पर पति मानस का टैटू भी नहीं हटवाया था. उनके शब्दों में, दिव्या के भीतर कहीं न कहीं उम्मीद थी कि रिश्ता ठीक हो जाएगा और उसका पति सुधर जाएगा.
‘फैमिली कोर्ट के काउंसलर से भी झड़प हुई थी’
प्रज्ञा ने दावा किया कि दिव्या ने उन्हें बताया था कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर के साथ भी आरोपी की झड़प हुई थी.
उन्होंने यह भी लिखा कि आरोपी पहले भी दिव्या का पीछा कर चुका था. तनाव की वजह से कुछ दिन पहले दिव्या का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनका हाथ और पैर टूट गया था. करीब डेढ़ से दो महीने बाद उन्होंने ऑफिस जाना शुरू किया था और प्रज्ञा के मुताबिक, वह अब भी लंगड़ाकर चलती थीं.
प्रज्ञा ने लिखा कि घटना वाले दिन जब दिव्या घर से निकली थीं, तब भी वह लंगड़ा रही थीं.
मां को अब तक नहीं बता पाईं प्रज्ञा
प्रज्ञा ने लिखा कि दिव्या का पोस्टमॉर्टम उस दिन नहीं हो पाया और सुबह 9-10 बजे का समय दिया गया था. उन्होंने बताया कि वह अभी तक अपनी मां को दिव्या की मौत की सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाई हैं.
प्रज्ञा ने लिखा कि उन्होंने अपनी मां को यह कहकर सुला दिया कि दिव्या की हालत गंभीर है. पहली बार उन्हें महसूस हो रहा है कि सच कहना कितना मुश्किल होता है.
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