लखनऊ अग्निकांड में बड़ा एक्शन... बिल्डिंग मालिक समेत 4 गिरफ्तार, 4 अफसर सस्पेंड, 7 दिन में रिपोर्ट देगी SIT

Lucknow Aliganj fire incident Updates: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला और एनिमेशन स्टूडियो फाउंडर तुषांक कृष्णा जैसवाल समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. मामले में 4 अफसर सस्पेंड किए गए हैं और सीएम योगी के निर्देश पर गठित एसआईटी 7 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

Lucknow Aliganj fire incident Updates

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आशीष श्रीवास्तव

• 08:16 AM • 23 Jun 2026

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Lucknow Aliganj fire incident Updates: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन और पुलिस एक्शन मोड में आ गई है. इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. हादसे को लेकर थाना अलीगंज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत छह नामजद आरोपियों सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

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बिल्डिंग मालिक और स्टूडियो फाउंडर समेत 4 गिरफ्तार

इस मामले में कुल 6 लोगों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, जिनमें से अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल हैं:

  • वीरेंद्र शुक्ला (बिल्डिंग मालिक)
  • तुषांक कृष्णा जैसवाल (एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के फाउंडर)
  • रामकृष्ण उपाध्याय (एनिमेशन स्टूडियो मैनेजर)
  • सुरेश कुमार शाहु

इसके साथ ही, लापरवाही बरतने के आरोप में प्रशासन ने चार अधिकारियों को भी सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है.

हाईलेवल मीटिंग के बाद 2 सदस्यीय SIT का गठन, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

हादसे की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए थे और देर शाम मामले को लेकर एक हाईलेवल रिव्यू मीटिंग की. इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है.

इस एसआईटी में इन अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है:

  1. अमृत अभिजात- अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग)
  2. प्रवीण कुमार- अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन

सरकार ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. यह जांच दल आग लगने के कारणों, भवन में सुरक्षा मानकों के पालन, वैधानिक स्वीकृतियों और किसी भी संभावित लापरवाही की गहन पड़ताल कर जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका तय करेगा. राज्य सरकार ने साफ किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

विवादों में रही है बिल्डिंग, 2016 में आया था ढहाने का आदेश

हादसे का शिकार हुई इस इमारत को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा भी सामने आया है. अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित इस भवन (संख्या एमएस/102/डी) का कुल क्षेत्रफल 1992 वर्गफुट है, जिसका 20 अगस्त 2014 को आवासीय मानचित्र (रेसिडेंशियल मैप) पास हुआ था.

हालांकि, साल 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस भवन में अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था. मामले की सुनवाई के बाद 10 मई 2016 को इस बिल्डिंग को ध्वस्त करने (ढहाने) का आदेश भी जारी हुआ था. लेकिन बाद में भवन मालिकों ने आपत्ति जताई कि उन्हें सुनवाई का सही मौका नहीं मिला और निर्माण नक्शे के अनुसार ही है, जिसके बाद 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण का यह आदेश निरस्त कर दिया गया था.

1980 में लॉटरी से आवंटित हुआ था भवन, ऐसे बदले मालिक

दस्तावेजों के मुताबिक, यह भवन सबसे पहले वर्ष 1980 में लॉटरी के जरिए आवंटित हुआ था. इसके बाद:

  • साल 2005 में: इसकी सेल डीड (विक्रय विलेख) विजय कुमार और उषा के नाम हुई.
  • साल 2013 में: इसे वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया गया.
  • 7 अगस्त 2014 को: एलडीए ने नए मालिकों के नाम पर भवन का नामांतरण (म्यूटेशन) कर दिया था.

इस दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब प्रशासन नए सिरे से भवन की स्वीकृतियों, निर्माण की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक अनियमितताओं की गहनता से जांच कर रहा है.

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