‘पुलवामा केस में फंस जाओगे...’, लखनऊ में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को 24 घंटे VIDEO कॉल पर रखा, फिर 18 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके 42 लाख ठगे

यूपी तक

• 09:10 AM • 18 Aug 2026

लखनऊ के लालबाग में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां साइबर ठगों ने 70 साल के रिटायर्ड एफसीआई कर्मचारी अंसार जमाल अब्बासी और उनकी पत्नी को पुलवामा आतंकी हमले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया.

Lucknow Digital Arrest Scam

Lucknow Digital Arrest Scam (AI Generated)

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Lucknow Digital Arrest Scam: लखनऊ के लालबाग में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां साइबर ठगों ने 70 साल के रिटायर्ड एफसीआई कर्मचारी अंसार जमाल अब्बासी और उनकी पत्नी को पुलवामा आतंकी हमले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया. आरोपियों ने खुद को ATS, NIA और CBI का अधिकारी बताकर दंपती को करीब 18 दिनों तक WhatsApp वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान बैंक खातों, एफडी, पोस्ट ऑफिस की जमा रकम और पत्नी के गहनों की जानकारी लेने के बाद छह RTGS ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 42,09,869 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए.

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पुलवामा केस का नाम लेकर शुरू किया डराने का खेल

पीड़ित अंसार जमाल अब्बासी के मुताबिक, 23 जुलाई को दोपहर 1:32 बजे उनके WhatsApp पर कॉल आई. फोन करने वाले ने दावा किया कि पुलवामा हमले में गिरफ्तार आतंकियों ने मनीष गोयल नाम के व्यक्ति का नाम लिया है. जांच के दौरान उसके पास पीड़ित के नाम से जारी सिम, ICICI बैंक का ATM कार्ड और बैंक स्टेटमेंट मिलने की बात कही गई. साथ ही पुलवामा केस में फंसने का डर भी बताया. आरोपियों ने बुजुर्ग और दिव्यांग होने का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बजाय उन्हें घर में ही ‘हाउस अरेस्ट’ किया जा रहा है.

24 घंटे VIDEO कॉल पर रहने का दिया आदेश

इसके बाद ठगों ने दंपती को मोबाइल की वीडियो कॉल 24 घंटे चालू रखने के लिए कहा. उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को इसकी जानकारी दी तो सात साल की सजा हो सकती है और तत्काल गिरफ्तारी कर ली जाएगी. डर के कारण दंपती ने आरोपियों को अपने बैंक खातों, एफडी और पोस्ट ऑफिस की जमा रकम की जानकारी दे दी. पत्नी के गहनों से जुड़ी जानकारी भी आरोपियों ने हासिल कर ली. करीब 10 मिनट बाद दूसरे नंबर से फोन आया, जिसमें आरोपी ने खुद को पुणे ATS का अधिकारी बताया.

जज से बात कराने का झांसा

24 जुलाई को ठगों ने दंपती की वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति से बातचीत कराई और उसे CBI अधिकारी तथा दूसरे व्यक्ति को हाईकोर्ट का जज बताया. आरोपियों ने कहा कि बातचीत के बाद केस और जमानत की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर उनके बताए बैंक खातों में RTGS के जरिए पैसे भेजने का सिलसिला शुरू हुआ. करीब 18 दिनों तक दंपती इसी डर और दबाव में रहे और कुल छह RTGS ट्रांजैक्शन में 42,09,869 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए.

साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई शिकायत

लगातार पैसे भेजने के बाद जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई. इंस्पेक्टर साइबर क्राइम आलोक राव ने बताया, “मुकदमा दर्ज करके ट्रांजैक्शन चैन की जांच की जा रही है.” पुलिस अब उन बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है, जिनके जरिए रकम आरोपियों तक पहुंची. जांच का फोकस ठगी में शामिल लोगों तक पहुंचने और पूरी ट्रांजैक्शन चेन का पता लगाने पर है.