आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक प्रतीक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पहली बार लखनऊ में इनर इंजीनियरिंग के माध्यम से हजारों लोगों को मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन का मार्ग दिखाएंगे. 1 मार्च को लखनऊ के स्मृति उपवन में आयोजित होने वाले 'वेव ऑफ ब्लिस्स' (आनंद लहर) कार्यक्रम में करीब 10000 लोग शिरकत करेंगे. लखनऊ से शुरू होने वाली यह आध्यात्मिक यात्रा आने वाले समय में प्रयागराज और वाराणसी के काशी कॉरिडोर तक पहुंचेगी.
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5 महीने की आध्यात्मिक यात्रा का भव्य समापन
यह महासत्संग उत्तर प्रदेश में पिछले पांच महीनों से चल रही व्यापक पहल 'इनर इंजीनियरिंग-वेव ऑफ ब्लिस' का समापन समारोह है. अक्टूबर से फरवरी तक चलने वाले इस अभियान के तहत लखनऊ, कानपुर, नोएडा, काशी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में लाखों लोगों को इनर इंजीनियरिंग से जोड़ा गया है.
21 मिनट में तनाव से मुक्ति
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शांभवी महामुद्रा क्रिया होगी. यह 21 मिनट की एक शक्तिशाली ध्यान प्रक्रिया है जिसे सद्गुरु ने विशेष रूप से आधुनिक जीवन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. इसका उद्देश्य शरीर, मन और ऊर्जा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है. हार्वर्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संस्थानों के अध्ययनों में पाया गया है कि इस क्रिया से तनाव, स्ट्रेस और अवसाद (Depression) में भारी कमी आती है.
काशी और प्रयागराज में भी लगेंगे शिविर
लखनऊ के बाद सद्गुरु का यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के अन्य आध्यात्मिक केंद्रों तक विस्तारित होगा. विशेष रूप से वाराणसी के काशी कॉरिडोर में सद्गुरु का ध्यान शिविर प्रस्तावित है जो काशी की प्राचीन ऊर्जा और आधुनिक चेतना का अनूठा संगम होगा. इसके बाद प्रयागराज में भी हजारों लोग इनर इंजीनियरिंग का हिस्सा बनेंगे. यह विशेष सत्संग उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले से 'इनर इंजीनियरिंग' कार्यक्रम पूरा कर लिया है और शांभवी महामुद्रा क्रिया में दीक्षित हो चुके हैं. सद्गुरु द्वारा विकसित यह कार्यक्रम जीवन को बेहतर ढंग से संभालने की कला सिखाता है जिससे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता में सुधार होता है.
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