जिस पिता ने फटे कपड़े-जूते पहन कमाए करोड़ों उसे उसके बेटे ने काट डाला, मानवेंद्र सिंह की कहानी सामने आई

Lucknow Crime News: लखनऊ के आशियाना में कलयुगी बेटे ने पिता की गोली मारकर की हत्या, शव के टुकड़े कर अलग-अलग जगह फेंके. जानें 12 पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह के संघर्ष और उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह की नफरत की पूरी कहानी.

UP News

अंकित मिश्रा

27 Feb 2026 (अपडेटेड: 27 Feb 2026, 06:57 PM)

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Lucknow Crime News: लखनऊ के आशियाना से सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. बीबीए छात्र अक्षत प्रताप सिंह ने 20 फरवरी की सुबह अपने ही पिता मानवेंद्र सिंह की लाइसेंसी राइफल से सिर में गोली मारकर हत्या कर दी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वारदात पारिवारिक विवाद और पैसों के लेनदेन को लेकर हुई कहासुनी के बाद अंजाम दी गई. हत्या के बाद आरोपी बेटे ने सबूत मिटाने की साजिश रची. पुलिस के मुताबिक अक्षत ने शव के टुकड़े किए और उन्हें नादरगंज और ट्रांसपोर्ट नगर के पास अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया. इस जघन्य अपराध को कुछ समय तक परिवार के भीतर ही दबाकर रखा गया.  बहन कृति ने भाई को खोने के डर से सच्चाई सामने नहीं आने दी, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पूरा मामला उजागर हो गया. 

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क्या है मानवेंद्र सिंह के संघर्ष की कहानी?

मृतक मानवेंद्र सिंह की कहानी संघर्ष से सफलता तक की रही है. उन्होंने लखनऊ में महज 5 हजार रुपये से काम शुरू किया था. हालात इतने खराब थे कि फटे जूते और एक ही शर्ट में हफ्तों काम करना पड़ता था. एक विवाद के बाद उन्होंने खुद ब्लड सैंपल कलेक्शन का काम शुरू किया और कड़ी मेहनत के बल पर 12 पैथोलॉजी के मालिक बन गए. करीबी बताते हैं कि उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को कभी नहीं छिपाया. एक दौर ऐसा भी था जब उनके पास बोरी भरकर पैसा आता था. 

एक साल पहले मानवेंद्र सिंह ने लिया था शराब का ठेका

मानवेंद्र ने करीब एक साल पहले शराब का ठेका भी लिया था, जिसके बाद उनकी व्यस्तता और बढ़ गई. मानवेंद्र परिवार के साथ पहले एल्डिको में रहते थे, लेकिन सात साल पहले उन्होंने आशियाना में नया घर खरीदा था. जानकारी मिली है कि घरेलू कलह के चलते अक्षत की मां ने आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के मुताबिक, अक्षत अपने पिता को मां की मौत का जिम्मेदार मानता था. पिता चाहते थे कि बेटा पैथोलॉजी का काम संभाले, जबकि अक्षत होटल व्यवसाय में अपना भविष्य देख रहा था. 

पुरानी है मानवेंद्र और अक्षत के रिश्तों की कड़वाहट 

मानवेंद्र के मित्र अंशुमान दुबे का कहना है कि रिश्तों में कड़वाहट काफी पुरानी थी. अक्षत जब 11 साल का था, तब मां की मौत के बाद ससुराल पक्ष ने मानवेंद्र को दोषी ठहराया और यही धारणा समय के साथ और गहरी होती चली गई. हैरानी की बात यह भी है कि आरोपी अक्षत रामलीला में रावण के साथ-साथ परशुराम का किरदार निभाता रहा है. कॉलोनी और रिश्तेदार उसके अंदाज की खूब तारीफ करते थे लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि वो ख़ुद एक दिन ऐसा कांड कर देगा. 

25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद अक्षत पूरी रात नहीं सो पाया. जेल सूत्रों के मुताबिक उसने खाना भी नहीं खाया और बेचैन हालत में रातभर जागता रहा. फिलहाल पुलिस परिवार के सदस्यों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है. मानवेंद्र और अक्षत किन-किन लोगों से संपर्क में थे, हत्या के बाद आरोपी ने किससे बात की इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है.  वारदात के वक्त घर में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज होंगे ताकि यह साफ हो सके कि इस हत्याकांड में किसी और की भूमिका तो नहीं है.