Lucknow Fire Incident News: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है. इस भयानक आग की चपेट में आने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अब्दुल रहमान भी शामिल थे. अब्दुल रहमान अपने परिवार के इकलौते सहारे थे और उनकी मौत के बाद अब पीड़ित परिवार के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. दुखी परिवार अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इंसाफ और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की गुहार लगा रहा है.
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पढ़ाई के साथ करता था जॉब, कंधों पर थी दिव्यांग पिता और बहन की जिम्मेदारी
अब्दुल रहमान के परिजन ने यूपी Tak की टीम से बातचीत में अपना दर्द साझा करते हुए बताया, "3:00 बजे जब आग लगी है तब तो हमने खुद ही सोशल साइट पर डाला था तब तक हमें नहीं पता था. अभी 8:00 बजे पता चला है कि हमारा भतीजा रहमान भी इस आग का शिकार हो गया."
उन्होंने परिवार की स्थिति बयां करते हुए बताया, "घर में पिताजी विकलांग (दिव्यांग) हैं. बच्चा अभी दो ही-तीन महीने हुए जॉब पे था. काम भी करता था, वहीं पढ़ाई भी करता था." एनीमेशन का कोर्स करने के बाद उसे इस संस्थान में नौकरी मिली थी, जहां वह मेहनत से परिवार का पालन-पोषण कर रहा था. पिता दिव्यांग हैं, मां मजबूर हैं और बहन की सारी जिम्मेदारी भाई अब्दुल रहमान के कंधों पर ही थी, लेकिन इस अनर्थ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. अब परिवार सवाल कर रहा है कि वे कैसे जिएंगे और कौन यह जिम्मेदारी उठाएगा.
खुले ट्रांसफार्मर और नंगे तारों पर उठाए सवाल, की 'बुलडोजर कार्रवाई' की मांग
पीड़ित परिवार ने इस घटना के पीछे प्रशासन और बिल्डिंग प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है. रहमान के कजिन ने कहा, "हम लोग चाहते हैं निष्पक्ष जांच हो और ज्यादा से ज्यादा परिवार को मुआवजा दिया जाए, क्योंकि उसकी मां की भी कोई ऐसी स्थिति नहीं है और परिवार में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं था. इकलौता बच्चा था, यही पालन-पोषण करता था."
उन्होंने लापरवाही का जिक्र करते हुए कहा, "जो आग लगी है इसमें बड़ी लापरवाही हुई है और मुझे ये लगता है कि जो ट्रांसफार्मर आगे रखा हुआ था, शॉर्ट सर्किट की वजह से... कई जगहों पे लखनऊ में आप देखते होंगे ट्रांसफार्मर खुली जगहों पे रखे हुए हैं, नंगे तार दिखते हैं. नंगे तारों की वजह से अक्सर हादसे हुआ करते हैं. सरकार से हमारी अपील यही है कि सरकार कोशिश यह करे कि शहरों में नंगे तार और शॉर्ट सर्किट गर्मी की वजह से जो होते हैं, उन्हें रोके."
बिना फायर एनओसी (NOC) और बिना रेजिडेंशियल-कमर्शियल अनुमति के चल रहे इस सेंटर को लेकर परिवार ने सीएम योगी से सख्त ऐक्शन की मांग की. उन्होंने कहा, "योगी जी को बड़ा एक्शन लेना चाहिए. हमें पता चला कि वह अलीगढ़ में थे, उसके बाद वह यहां पहुंचे भी. मगर उन पर बुलडोजर वगैरह... जी बिल्कुल बुलडोजर कार्रवाई होना चाहिए, जैसे सभी जगह योगी जी करते हैं तो यहां भी करें. आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए."
बिल्डिंग में धज्जियां उड़े नियम: बायोमेट्रिक लॉक होने से फंसे बच्चे?
इस अग्निकांड के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सूत्रों और इनपुट के अनुसार, बिल्डिंग के नक्शे और नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थीं. इमारत में बाहर निकलने का न तो कोई सही रास्ता था और न ही इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया था. सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि आग लगने की घटना के दौरान बाहर निकलने के सारे दरवाजे लॉक हो चुके थे, क्योंकि वे सभी दरवाजे सिर्फ बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/सेंसर) से काम करते थे, जिसके चलते बिजली कटने या सिस्टम फेल होने पर बच्चे अंदर ही फंस गए. सवाल उठ रहा है कि क्या कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलडीए (LDA) या नगर निगम ने मानकों की जांच की थी? और क्या हर बार किसी बड़े हादसे का ही इंतजार किया जाता है?
आपको बता दें कि मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी (ADG) प्रवीण कुमार शामिल हैं. एसआईटी 7 दिनों के अंदर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी. वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.
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