Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक और दर्दनाक जानकारी सामने आई है. इस हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव के मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि आदित्य ने अपनी मां की आंखों के सामने दम तोड़ दिया. यह घटना परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है.
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बेटे से मिलने बिसवां से आई थीं मां, आंखों के सामने निकलता रहा धुआं
रविन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार, आदित्य की मां अपने बेटे से मिलने के लिए सीतापुर जिले के बिसवां से लखनऊ पहुंची थीं. जब वह अपने छोटे बेटे के साथ उस इमारत के पास पहुंचीं, जहां आदित्य काम करता था, तब तक वहां भीषण आग लग चुकी थी. बिल्डिंग से धुआं और लपटें निकल रही थीं. बेटे को बचाने की उम्मीद में वह लगातार मदद के लिए गुहार लगाती रहीं, लेकिन चाहकर भी अपने बेटे को नहीं बचा सकीं.
मृतक आदित्य की मां ने खुद मौके की स्थिति बताते हुए कहा, "मैंने देखा है. मैंने सब देखा. मैं दोपहर 2:20 तक पहुंच गई थी. पर तब तक धुआं आ रहा था. उसके बाद तो निकलता रहा ढाई घंटे तक."
उन्होंने आगे रोते हुए कहा, "क्या उम्र थी 25, 25वां चल रहा था. वो फोन किसी का उठा नहीं पाया."
तमाशबीन और मीडिया पर फूटा मां का गुस्सा, कहा- वीडियो बनाने के बजाय ध्यान देते तो बच्चे बच जाते
घटनास्थल पर राहत कार्य और लोगों के रवैये को लेकर मां ने गहरा आक्रोश और दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "जिस तरह अभी मैंने देखा कि सीएम साहब आने वाले थे अगर उस टाइम इसी तरह ध्यान दिया जाता है तो हो सकता है बच्चे बचे जाते. बच्चे बचाये जा सकते थे."
मीडिया और वीडियो बनाने वालों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "पर यही कहना है की अगर जैसे आप लोग मीडिया वाले हो आधी बात झूठी कहते हो आधी बात सच्ची कहते हो. उस समय मीडिया वाले हमसे बोल रहे थे की 8 बच्चों को भेजा जा चूका है. 7 बच्चों को भेजा जा चूका है. आंटी परेशान न हो आपके बच्चे को भेजा जा चूका है. ऐसे बोल रहे थे. अगर ये सब करने के बजाय ये वीडियो बनाने के बजाय अगर थोड़ा ध्यान दे लिए होते तो आज इतने सारे बच्चे सब बच गए होते. मेरा बेटा भी आज जिंदा होता. मेरी तो दुनिया उजड़ गई भैया."
मामा ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
आदित्य के मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने भावुक होकर बताया कि आदित्य बेहद साहसी स्वभाव का था और किसी भी चुनौती से डरता नहीं था. उन्होंने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि आग और व्यवस्था की कथित लापरवाही उसके जीवन को इस तरह खत्म कर देगी. आंसुओं के बीच रविन्द्र ने व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ दिनों तक इस घटना की चर्चा होगी, जांच और कार्रवाई की बातें होंगी, लेकिन समय बीतने के साथ लोग इसे भूल जाएंगे. उनका आरोप है कि जब तक व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा, तब तक आम लोगों की जान इसी तरह जोखिम में पड़ती रहेगी.
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