कानपुर में 40 साल बाद पुरानी फोटो ने कराया बाप-बेटे का मिलन, अस्पताल में फफक-फफक कर रोया परिवार

Kanpur News: कानपुर में 40 साल पहले परिवार से बिछड़े चतुरी गुप्ता का अस्पताल में बेटों से भावुक मिलन हुआ. एक पुरानी धुंधली तस्वीर के जरिए बेटों ने अपने पिता को पहचाना.

यूपी तक

• 06:31 PM • 28 Apr 2026

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कहते हैं कि वक्त घाव भर देता है, लेकिन कभी-कभी यही वक्त रिश्तों पर धूल भी जमा देता है. कानपुर से रिश्तों के पुनर्जन्म की एक ऐसी भावुक कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. यह कहानी है चतुरी गुप्ता की, जो अपनों से एक-दो साल नहीं, बल्कि पूरे 4 दशक (40 साल) तक दूर रहे.

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40 साल पहले की एक जिद और 'लापता' जिंदगी

करीब 40 साल पहले एक पारिवारिक विवाद के चलते चतुरी गुप्ता अपने घर-परिवार से दूर हो गए थे. इन सालों में उन्होंने समाज से कटकर एक गुमनाम जिंदगी बिताई. हालात ऐसे बदले कि घरवाले उन्हें मृत मान चुके थे और बेटों के जेहन में पिता का चेहरा तक धुंधला पड़ चुका था. उम्र के इस पड़ाव पर जब चतुरी गुप्ता बीमार हुए, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.

सामाजिक कार्यकर्ता बना 'फरिश्ता'

जब चतुरी गुप्ता की हालत गंभीर हुई, तो सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना चौहान ने उनके परिवार को खोजने का बीड़ा उठाया. पुराने संपर्कों और कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उनके बेटों का पता लगा लिया गया. बेटे कानपुर तो पहुँच गए, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पहचान की थी. 40 साल के लंबे अंतराल ने पिता का हुलिया पूरी तरह बदल दिया था.

एक पुरानी तस्वीर और आंखों में आँसू

पहचान के इस संकट के बीच सहारा बनी 'एक धुंधली पुरानी तस्वीर'. परिवार के पास मौजूद उस बरसों पुरानी फोटो ने पहचान की दीवार को गिरा दिया. जैसे ही बेटों ने पिता को पहचाना, अस्पताल का कमरा भावनाओं के सैलाब से भर गया. 40 साल की दूरियां पल भर में खत्म हो गईं और खून के रिश्ते एक बार फिर जीत गए.

रिश्तों की अहमियत का बड़ा संदेश

चतुरी गुप्ता की इस कहानी ने यह साबित कर दिया कि वक्त कितना भी बीत जाए, परिवार की जड़ें कभी खत्म नहीं होतीं. आर्थिक तंगी, लंबी बीमारी और समय का फासला रिश्तों को कमजोर जरूर कर सकता है, लेकिन उन्हें मिटा नहीं सकता. अस्पताल में हुआ यह मिलन आज पूरे कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है.