पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा होने पर कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी ने अपना दर्द और गुस्सा साझा किया है. 22 अप्रैल 2025 को हुए उस हमले में 26 भारतीयों की जान गई थी, जिसमें शुभम पहले शिकार बने थे.
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2 महीने की शादी और उम्र भर का सन्नाटा
ऐशन्या बताती हैं कि उनकी शादी को महज दो महीने ही हुए थे जब उन्होंने अपने पति को खो दिया. वह कहती हैं, "उसी घर में वापस आना, उसी कमरे में रहना जहां शुभम की यादें तो हैं पर वह खुद नहीं, यह बहुत कठिन है. मैंने उनके सारे रिश्तों को अपना बना लिया है, लेकिन उनका न होना एक ऐसा खालीपन है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता." ऐशन्या आज भी शुभम की तस्वीर के सामने बैठकर उनसे बातें करती हैं और उनकी आवाज़ याद करने की कोशिश करती हैं.
'पाकिस्तान शांति का झंडा दिखाने वाला आतंकी देश'
पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की बात करने पर ऐशन्या ने तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, "जो खुद आतंकवाद का पर्याय हो, वह शांति का झंडा दिखा रहा है. पाकिस्तान सिर्फ ग्लोबल न्यूज़ में बने रहने के लिए ऐसी बातें करता है. पूरी दुनिया को मिलकर पाकिस्तान का बायकॉट करना चाहिए." उन्होंने आगे कहा कि जब भारतीय सेना ने आतंकियों को ढेर किया, तो पाकिस्तान ने उन्हें अपने राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर विदाई दी, जो साबित करता है कि वह आतंक का खुला समर्थक है.
शहीद का दर्जा और राष्ट्रीय सम्मान की मांग
ऐशन्या ने भारत सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक विशेष मांग की है. उनका कहना है कि यह कोई सामान्य हमला नहीं था, बल्कि 'टारगेटेड किलिंग' थी जहाँ धर्म पूछकर गोली मारी गई. वह कहती हैं, "शुभम और उन 26 लोगों ने अपना धर्म बताकर गोली खाई है. वे राष्ट्रीय सम्मान के हकदार हैं. मैं उन्हें 'शहीद शुभम द्विवेदी' कहती हूँ क्योंकि उन्होंने देश और धर्म के लिए जान दी. मुख्यमंत्री जी से मिलने का समय माँगा है ताकि मैं अपनी बात रख सकूँ."
कश्मीर और पर्यटन पर कड़ा रुख
कश्मीर जाने के सवाल पर ऐशन्या भावुक हो गईं. उन्होंने कहा, "उस जगह ने मेरी दुनिया खत्म कर दी, मुझसे मेरा सब कुछ छीन लिया. मैं कभी वापस कश्मीर नहीं जाना चाहूँगी." पर्यटकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर के दो चेहरे हैं—एक जो पर्यटन से आतंक खत्म करना चाहता है और दूसरा वह जिसने उन आतंकियों को पनाह दी और खाना खिलाया. उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपना विवेक इस्तेमाल कर तय करें कि उन्हें वहां जाना है या नहीं.
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