गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक युवती की संदिग्ध मौत का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संग्राम में तब्दील हो गया है. अस्पताल से युवती के परिजनों के डिस्चार्ज होने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस और समाजवादी पार्टी के बीच सीधे टकराव का रूप ले चुका है.
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डूबने से मौत या साजिश? पुलिस और सपा में ठनी
पुलिस के अनुसार, युवती की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया है, और पुलिस इसे एक दुर्घटना मान रही है. हालांकि, समाजवादी पार्टी ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए पुलिस पर तथ्य छिपाने और पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया है. सपा का दावा है कि पीड़ित परिवार को डरा-धमकाकर अस्पताल से डिस्चार्ज कराया गया और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया, ताकि मामले को दबाया जा सके.
मुलाकात करने पहुंचे डेलिगेशन पर पथराव
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे समाजवादी पार्टी के डेलिगेशन और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर जमकर पत्थरबाजी हुई. इस हिंसक झड़प में सपा के कई नेता और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. प्रशासन ने इस घटना के लिए 'अराजक तत्वों' को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि सपा ने इसे सत्ता संरक्षित लोगों द्वारा किया गया हमला करार दिया है.
पुलिसिया कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप
पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए हमले के मुकदमे दर्ज किए हैं और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है. पुलिस का यह भी आरोप है कि सपा डेलिगेशन ने बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को बुलाकर गांव का माहौल खराब करने की कोशिश की. वहीं, समाजवादी पार्टी ने इसे न्याय की आवाज दबाने की कोशिश बताया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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