पीलीभीत में 25 करोड़ के स्कूल में 'बिस्कुट' जैसी ईंटें; वायरल वीडियो देख भड़के विधायक, रुका काम

UP Corruption News: पीलीभीत के बरखेड़ा में बन रहे कंपोजिट विद्यालय में भ्रष्टाचार का मामला. हाथ से मारते ही टूट रही ईंटें, विधायक ने रुकवाया निर्माण। लैब टेस्टिंग के आदेश.

यूपी तक

• 06:47 PM • 22 Apr 2026

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पीलीभीत में भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे देखकर कोई भी दंग रह जाए. करीब 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे एक कंपोजिट विद्यालय में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था. इस धांधली का खुलासा तब हुआ जब एक वायरल वीडियो में ईंटों को हाथ से मारते ही वे बिस्कुट की तरह टूटती नजर आईं.

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विधायक के निरीक्षण में खुली पोल

यह मामला पीलीभीत के बरखेड़ा इलाके का है. करीब 15-20 दिन पहले जब स्थानीय विधायक ने निर्माण कार्य का औचक निरीक्षण किया, तो वहां इस्तेमाल हो रही ईंटों की गुणवत्ता देखकर वह भड़क गए. वीडियो में साफ देखा गया कि ईंटें इतनी कमजोर थीं कि उन्हें आपस में बजाने पर ही वे चकनाचूर हो रही थीं. विधायक ने तुरंत काम रुकवाया और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.

डीएम का एक्शन: लैब टेस्टिंग के आदेश

मामला गरमाने के बाद जिलाधिकारी (DM) ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है. फिलहाल निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही सामग्री को लैब टेस्टिंग के लिए भेज दिया गया है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं हो जाती, तब तक काम आगे नहीं बढ़ेगा. इसके साथ ही मौके से खराब ईंटों को हटाकर नई और मानक के अनुरूप सामग्री लाने के निर्देश दिए गए हैं.

25 करोड़ का बजट और इतनी बड़ी लापरवाही?

इस घटना ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि जिस स्कूल में भविष्य के नौनिहाल पढ़ेंगे, उसकी बुनियाद के साथ ऐसा खिलवाड़ कैसे किया जा सकता है? 25 करोड़ रुपये के बड़े बजट के बावजूद ठेकेदार और संबंधित कंपनी ने इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने की हिम्मत कैसे की? हालांकि प्रशासन ने सुधार के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक दोषी ठेकेदार या कंपनी पर किसी बड़ी कार्रवाई की खबर नहीं आई है.

सोशल मीडिया और जनता की सतर्कता ने बचाया

यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया और आम जनता की सतर्कता बड़े हादसों को टाल सकती है. अगर यह वीडियो वायरल न होता और समय रहते निरीक्षण न किया जाता, तो शायद बच्चों के भविष्य के नाम पर एक 'कमजोर इमारत' खड़ी कर दी जाती. फिलहाल, स्थानीय अधिकारी लगातार मौके का मुआयना कर रहे हैं ताकि आगे निर्माण में कोई अनियमितता न हो.