उन्नाव के रहने वाले प्रसिद्ध कथा वाचक अवधेश लोधी के साथ लखनऊ में हुई बर्बरता की घटना ने उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. एक कथा वाचक के साथ हुई मारपीट और जातिगत अपमान के इस मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है, जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद हस्तक्षेप किया है.
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कथा के बाद खौफनाक रात, जंगल में छिपकर बचाई जान
पीड़ित अवधेश लोधी के अनुसार, घटना 6 अप्रैल 2026 की है. लखनऊ में कथा संपन्न होने के बाद जब उन्होंने अपने पारिश्रमिक (पैसों) की मांग की, तो आरोपियों ने उन्हें बंधक बना लिया. आरोप है कि उन्हें जबरन लखनऊ ले जाया गया, जहां उन्हें शराब पीने पर मजबूर किया गया. मना करने पर आरोपियों ने उनके साथ जमकर मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं. अवधेश का कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद वे किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले और पूरी रात जंगल में छिपकर गुजारी.
अखिलेश यादव से मुलाकात और 'अधूरे मंदिर' का संकल्प
शुरुआत में पुलिस कार्रवाई न होने पर अवधेश लोधी ने समाजवादी पार्टी से मदद की गुहार लगाई. मामला संज्ञान में आते ही अखिलेश यादव ने अवधेश लोधी को लखनऊ बुलाकर उनसे मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया. अखिलेश यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित को न्याय का भरोसा दिलाया. मुलाकात के दौरान जब अखिलेश यादव को पता चला कि अवधेश लोधी का एक मंदिर अधूरा पड़ा है, तो उन्होंने तुरंत उसे पूरा करवाने में मदद का वादा किया.
समाजवादी पार्टी के दबाव और मामले के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, लखनऊ पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं और SC/ST अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. सपा नेताओं का कहना है कि यह केवल एक कलाकार पर हमला नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पिछड़े समाज के सम्मान पर चोट है.
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