उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो किसी को भी हैरान कर सकती है. यहां एक शख्स कागजों में तो 14 साल पहले 'मर' चुका है, लेकिन असल जिंदगी में वह आज भी जिंदा है और खुद को जीवित साबित करने के लिए कफन पहनकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है.
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वजूद की अजीब लड़ाई: कागजों में मृत, विभाग में नौकरी
मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का है. इशाक अली नाम के एक बुजुर्ग के साथ राजस्व विभाग ने ऐसा अनोखा खेल खेला कि उन्हें 2012 में ही कागजों में मृत घोषित कर दिया गया. ताज्जुब की बात यह है कि जहां राजस्व विभाग ने उन्हें मुर्दा मान लिया, वहीं स्वास्थ्य विभाग उन्हें पिछले कई सालों से जिंदा मानकर वेतन दे रहा था. यानी एक सरकारी विभाग की नजर में वे मर चुके थे और दूसरे की नजर में वे ड्यूटी कर रहे थे.
कफन पहनकर पहुंचे कलेक्ट्रेट, प्रशासन में हड़कंप
जब इशाक अली को पता चला कि राजस्व विभाग की इस 'कागजी मौत' की वजह से उनकी जमीन किसी और के नाम दर्ज कर दी गई है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. सालों तक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो वे विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए. उन्हें इस हाल में देख अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया.
दोषी कर्मचारियों पर गिरेगी गाज?
इशाक अली का आरोप है कि भू-माफियाओं और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से उनकी जमीन हड़पने के लिए उन्हें मृत घोषित किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए उप-जिलाधिकारी (SDM) ने जांच के आदेश दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि यह एक गंभीर लापरवाही है और जो भी कर्मचारी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल, सोशल मीडिया पर इशाक अली की कफन वाली तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जो सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के सरकारी सिस्टम की 'सुस्ती' पर तंज कस रही हैं.
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