उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आप भी माथा पीट लेंगे. जिले के मझवां विधानसभा क्षेत्र में इंजीनियरिंग का ऐसा 'अद्भुत' नमूना पेश किया गया है, जहां चमचमाती सीसी रोड (CC Road) के ठीक बीचों-बीच बिजली का खंभा सीना ताने खड़ा है. सड़क तो बन गई, लेकिन यह खंभा अब राहगीरों के लिए काल का ग्रास बना हुआ है.
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सड़क बनी पर खंभा हटाना भूले अफसर
मामला कछवां-निगतपुर मार्ग का है. ग्रामीणों के अनुसार, निगतपुर रेलवे स्टेशन को जोड़ने के लिए इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण कराया गया था ताकि लोगों का आवागमन आसान हो सके. लेकिन प्रशासन की लापरवाही देखिए—सड़क पूरी बन गई, ढलाई हो गई, मगर बीच रास्ते में आ रहे बिजली के पोल को हटाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई. आलम यह है कि सड़क के बीचों-बीच खड़ा यह खंभा अब हादसों को दावत दे रहा है.
हादसों का 'ब्लैक स्पॉट' बनी सड़क
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में यह खंभा दिखाई नहीं देता, जिससे टकराकर अब तक कई बाइक सवार चोटिल हो चुके हैं. ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग और जिला प्रशासन से इस 'मौत के खंभे' को हटाने की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा.
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
ग्राम प्रधान दयाशंकर पटेल का कहना है कि मंत्री आशीष पटेल के प्रयासों से निगतपुर स्टेशन को जोड़ने वाली इस सड़क को मंजूरी मिली थी. उनके मुताबिक, "सड़क का निर्माण बेहद जरूरी था, इसलिए पहले उसे बनवा दिया गया. खंभा कभी भी शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन विभाग की सुस्ती की वजह से यह मामला अभी भी लंबित है."
यह स्थिति न केवल बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग के बीच तालमेल की कमी को दर्शाती है, बल्कि सरकारी धन के बंदरबांट और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ पर भी बड़े सवाल खड़े करती है.
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