उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की राजनीतिक सरगर्मी इन दिनों समाजवादी पार्टी के विधायक इंद्रजीत सरोज के एक कड़े बयान के बाद बढ़ गई है. आंबेडकर जयंती के अवसर पर एक सार्वजनिक मंच से इंद्रजीत सरोज ने विरोधियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि जो लोग उनके बेटे और परिवार को निशाना बना रहे हैं, समय आने पर उन्हें 'नानी याद दिला दी जाएगी'.
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क्या है विवाद की असली वजह?
इस तीखी बयानबाजी के पीछे का मुख्य कारण भाजपा के जिला पंचायत सदस्य वीरेन्द्र फौजी की एक टिप्पणी को माना जा रहा है. आरोप है कि वीरेन्द्र फौजी ने इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज की विदेशी शिक्षा और उनके आर्थिक स्रोतों को लेकर सवाल उठाए थे. विधायक ने इसे न केवल व्यक्तिगत हमला माना, बल्कि इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित करार दिया.
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े तेवर
इंद्रजीत सरोज ने केवल निजी हमले का जवाब ही नहीं दिया, बल्कि क्षेत्र में फैली सरकारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर भी प्रशासन को घेरा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता के मुद्दों पर झुकने वाले नहीं हैं और जो लोग सत्ता के नशे में उनके परिवार को गालियां दे रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसका परिणाम भुगतना होगा.
कौशांबी में गर्माई राजनीति
विधायक की इस खुली चेतावनी को कौशांबी की क्षेत्रीय राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है. जानकार इसे आने वाले चुनावों से पहले जमीन मजबूत करने और समर्थकों में जोश भरने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं. इंद्रजीत सरोज का यह सख्त रुख सपा की छवि को स्थानीय स्तर पर एक 'लड़ाकू' पार्टी के रूप में पेश कर रहा है.
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