Lucknow Fire Incident: लखनऊ के विकास नगर में लगी भीषण आग के बाद जब लपटें शांत हुईं और धुआं छंटा, तो सुबह का मंजर बेहद दर्दनाक नजर आया. जहां कभी सैकड़ों परिवारों का बसेरा था, वहां अब सिर्फ राख और तबाही के निशान बचे थे. जिन झोपड़ियों में लोगों की पूरी जिंदगी बसी थी, वे पलभर में जलकर खत्म हो गईं और अब परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. इस हादसे ने न केवल लोगों की मेहनत की कमाई को खत्म कर दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लीं. प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अग्निकांड में दो मासूम बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है.
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आग के बाद सामने आया दिल दहला देने वाला मंजर
आग बुझने के बाद जब सुबह हुई, तो विकास नगर का दृश्य किसी श्मशान से कम नहीं था. चारों ओर जली हुई झोपड़ियां, राख और बिखरा सामान नजर आ रहा था. सैकड़ों परिवार, जिनकी पूरी जिंदगी इन झोपड़ियों में बीत रही थी, अब बेघर हो चुके हैं.
लोग राख में अपने हाथ फेरते नजर आए, इस उम्मीद में कि शायद उनका कोई जरूरी सामान या यादगार चीज बच गई हो. कोई जले हुए बक्से खोलकर सामान ढूंढ रहा था, तो कोई अपने परिवार के सदस्यों को तलाश कर रहा था. कई माता-पिता अपने बच्चों के जले हुए कपड़े और खिलौने देखकर भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक सके.
दो मासूम बच्चों की मौत, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 16 अप्रैल की सुबह करीब 10:30 बजे तक इस हादसे में दो मासूम बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है. बताया गया कि रात के दौरान चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में देर रात दो शव बरामद किए गए थे.
मृत बच्चों की पहचान उनके परिजनों द्वारा की गई है. जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चों की उम्र करीब 2 साल के आसपास बताई जा रही है. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
15 अप्रैल की शाम सिलेंडर धमाकों से फैली आग
बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल की शाम लखनऊ के विकास नगर में अचानक भीषण आग लग गई थी. आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में हालात बेकाबू हो गए.
इस दौरान लगातार 10 गैस सिलेंडर धमाके होने की बात सामने आई है, जिससे आग और भी विकराल हो गई. देखते ही देखते करीब 200 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं. धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि पूरे इलाके में दहशत फैल गई.
स्थिति को देखते हुए कई लोगों ने अपने घरों में रखे सिलेंडरों को नालों में डाल दिया, ताकि किसी बड़े विस्फोट को रोका जा सके और नुकसान को कम किया जा सके.
सालों की मेहनत पलभर में हुई खत्म
इस हादसे ने उन परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जो पिछले कई वर्षों से यहां रह रहे थे. कुछ लोग करीब 40 साल से इस इलाके में रह रहे थे, जबकि कई परिवार 20 साल से यहां बसे हुए थे.
लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की मेहनत से जो सामान और घर बनाए थे, वह सब एक ही रात में खत्म हो गया. जिन घरों में कल तक खुशियां थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और मायूसी नजर आ रही है.
मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने लिया संज्ञान
इस भीषण अग्निकांड की सूचना मिलते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए.
वहीं, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भी घटनास्थल पर पहुंचे और वहां चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की. प्रशासन के अनुसार, दमकल विभाग की गाड़ियों ने देर रात तक कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया.
घायलों का इलाज जारी, राहत कार्य जारी
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि आग में झुलसे लोगों का इलाज कराया जा रहा है. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. फिलहाल प्रशासन द्वारा नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई जारी है.
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