उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित पासी समाज के महासम्मेलन में सियासत उस वक्त गरमा गई, जब बीजेपी विधायक श्याम प्रकाश ने मंच से विवादित टिप्पणी कर दी. गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश ने मूर्ति पूजा पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'जीवित भगवान' की संज्ञा दे डाली. उनके इस बयान के बाद अब यह बहस छिड़ गई है कि यह अंधविश्वास के खिलाफ आवाज है या करोड़ों लोगों की आस्था पर चोट.
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'जिंदा आदमी को भगवान मानो, पाखंड छोड़ो'
गांधी मैदान में आयोजित सम्मेलन के दौरान विधायक श्याम प्रकाश ने कहा, "पत्थरों के आगे गिड़गिड़ाओगे तो वे आपको कुछ देने वाले नहीं हैं. इसलिए साथियों, पाखंडवाद छोड़कर अपने परिवार और समाज को एकत्रित करिए. हम तो जिंदा आदमी को भगवान मानते हैं और हमारे योगी जी व मोदी जी निश्चित रूप से भगवान के रूप में हैं. अगर हम उन्हें मानते हैं तो कोई बुराई नहीं है, क्योंकि उनमें हमें कुछ देने की क्षमता है." उन्होंने दलित समाज से विशेष रूप से अपील की कि वे इधर-उधर भटकने के बजाय 'आज के देवताओं' के साथ आएं.
विवाद बढ़ा तो दी ये सफाई
विधायक के इस बयान ने उस वक्त और गंभीर मोड़ ले लिया जब उनसे प्रधानमंत्री द्वारा की गई राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सवाल पूछा गया. इस पर सफाई देते हुए श्याम प्रकाश ने कहा, "मेरा इशारा किसी विशेष मूर्ति या अयोध्या की प्राण प्रतिष्ठा की ओर नहीं था. मैं उन पत्थरों की बात कर रहा था जिन्हें लोग अंधविश्वास में पूजते हैं, विशेषकर हमारा दलित समाज. प्रधानमंत्री जी द्वारा की गई प्राण प्रतिष्ठा उनका व्यक्तिगत विषय है और मेरा बयान मेरा व्यक्तिगत मत है." उन्होंने जोर दिया कि वे केवल समाज को अंधविश्वास से निकालकर शिक्षा की ओर ले जाना चाहते थे.
विपक्ष के हाथ लगा सियासी मुद्दा
इस महासम्मेलन में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और सांसद अशोक रावत जैसे दिग्गज मौजूद थे, जिनकी उपस्थिति में यह बयान दिया गया. अब राजनीतिक विश्लेषक इसे बीजेपी के लिए असहज करने वाली स्थिति मान रहे हैं. सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक तरफ मंदिर और आस्था की राजनीति करने वाली बीजेपी अपने विधायक के इस 'मूर्ति पूजा विरोधी' बयान पर क्या रुख अपनाएगी? वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह बयान एक बड़ा सियासी हथियार बन सकता है.
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