ग्लैमर की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्ष रिछारिया ने संन्यास लेकर सबको हैरान कर दिया है. 19 अप्रैल को उज्जैन के प्रतिष्ठित 'मौन तीर्थ' में उन्होंने विधि-विधान के साथ संन्यास ग्रहण किया. अब हर्ष रिछारिया का नया नाम साध्वी हर्षानंद गिरी है. उन्होंने मॉडलिंग की चकाचौंध को अलविदा कहकर अध्यात्म और सनातन धर्म का मार्ग चुन लिया है.
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कुंभ से शुरू हुआ वैराग्य का सफर
हर्ष रिछारिया का संन्यास की ओर झुकाव महाकुंभ 2025 के दौरान चर्चा में आया था. उन्होंने प्रयागराज में ही मंत्र दीक्षा ली थी और तभी से वे आध्यात्मिक जीवन की तैयारी कर रही थीं. संन्यास की प्रक्रिया के दौरान, परंपरा के अनुसार उन्होंने खुद का पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म पूर्ण किया, जो सांसारिक जीवन के अंत और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है.
लाखों फॉलोअर्स और ग्लैमर को क्यों छोड़ा?
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई करने वाली हर्ष ने महज 16 साल की उम्र में मॉडलिंग और एक्टिंग की शुरुआत कर दी थी. इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन इस सफलता के बावजूद उन्हें मानसिक शांति नहीं मिली. साध्वी हर्षानंद गिरी का मानना है कि संसार के रिश्ते अक्सर स्वार्थ पर टिके होते हैं और दुःख की घड़ी में कोई साथ नहीं देता. पिछले डेढ़ साल के गहरे चिंतन के बाद उन्होंने ईश्वर और गुरुदेव की सेवा को ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य माना.
विरोध के बावजूद चुना 'धर्म' का रास्ता
साध्वी हर्षानंद गिरी ने बताया कि ग्लैमर की दुनिया छोड़कर साध्वी बनने का फैसला आसान नहीं था. उन्हें कई विरोधों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके गुरु स्वामी सुमनानंद गिरी के मार्गदर्शन ने उन्हें साहस दिया. उन्होंने कहा कि धर्म वह मार्ग है जिसे एक बार आत्मसात कर लेने के बाद पीछे मुड़कर देखना संभव नहीं है.
अब समाज और सनातन के लिए समर्पित जीवन
अब साध्वी हर्षानंद गिरी का लक्ष्य अपने परिवार, समाज और सनातन धर्म के लिए जीवन व्यतीत करना है. उनकी यह कहानी न केवल प्रेरक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जीवन के किसी भी मोड़ पर व्यक्ति भौतिक सुखों का त्याग कर सत्य की खोज में निकल सकता है.
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