उत्तर प्रदेश के चर्चित और 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने 'तकनीकी इस्तीफे' को वापस ले लिया है. लगभग एक महीने पहले उनके इस्तीफे की खबर ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी. रिंकू राही ने उस वक्त दावा किया था कि उन्हें उनकी योग्यता और पद के अनुरूप काम नहीं मिल रहा है, जिससे निराश होकर उन्होंने सेवा छोड़ने का फैसला किया था.
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गोपनीय तरीके से वापसी की प्रक्रिया
ताजा जानकारी के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को काफी गोपनीय रखा गया है और अभी तक शासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. राही ने अपने मूल कैडर में वापसी की मांग की थी, जिस पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है. गौरतलब है कि उन्होंने अपना इस्तीफा 26 मार्च को राष्ट्रपति और संबंधित विभागों को भेजा था.
मौत को मात देकर बने थे IAS
रिंकू सिंह राही का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. PCS अधिकारी के तौर पर तैनाती के दौरान उन्होंने मुजफ्फरनगर में 80 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस ईमानदारी की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी और साल 2009 में उन पर जानलेवा हमला हुआ. इस हमले में उन्हें 7 गोलियां लगी थीं, जिससे उनका चेहरा खराब हो गया और वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए.
16 बार की परीक्षा और अटूट संकल्प
इतने भीषण हमले और शारीरिक अक्षमता के बावजूद रिंकू राही ने हार नहीं मानी. उन्होंने सिस्टम की खामियों से लड़ने के लिए IAS बनने की ठानी और 16 बार परीक्षा में शामिल होकर अपना सपना पूरा किया. उनका यह संघर्ष देशभर के यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
प्रशासनिक प्रणाली और व्यक्तिगत दबाव
रिंकू राही का इस्तीफा और फिर उसकी वापसी प्रशासनिक प्रणाली के भीतर के दबाव और एक ईमानदार अधिकारी के व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाती है. फिलहाल मामला उच्च स्तर पर विचाराधीन है और जल्द ही उनकी नई तैनाती या कैडर वापसी पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है.
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