31 साल पहले हुए मासूम संदीप बंसल के अपहरण और हत्याकांड ने दिल्ली को दहला दिया था. 13 साल के भाई को खोने का गम और इंसाफ के लिए तीन दशकों का लंबा इंतजार संदीप की बुजुर्ग मां की आंखों से बहते आंसू उस भयावह दौर की पूरी दास्तान बयां कर रहे हैं. सलीम खान की गिरफ्तारी ने बंसल परिवार के उन जख्मों को फिर से कुरेद दिया है जो कभी भरे ही नहीं थे.
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मार्शल आर्ट्स ट्रेनर ही निकला कातिल
यह मामला 1995 का है, जब 13 वर्षीय संदीप बंसल का अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई थी. हैरानी की बात यह थी कि सलीम खान कोई और नहीं, बल्कि संदीप का मार्शल आर्ट्स ट्रेनर था. जिस पर परिवार ने भरोसा किया, उसी ने फिरौती के लिए संदीप को मौत के घाट उतारकर उसका शव नाले में फेंक दिया था. 1997 में कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन साल 2000 में पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया.
मां की सिसकियां: "कातिल को फांसी मिले"
संदीप की मां आज भी अपने बेटे की याद में तड़प उठती हैं. सलीम खान की गिरफ्तारी की खबर सुनकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने रुंधे गले से कहा, "मेरे बेटे को उसने बेरहमी से मारा, अब उस कातिल को फांसी की सजा होनी चाहिए तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी." परिवार ने 31 साल तक हर दरवाजे पर दस्तक दी और न्याय के लिए एक लंबी और थका देने वाली लड़ाई लड़ी है.
पहचान बदलकर लोनी में छिपा था सलीम
कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए सलीम खान ने अपनी पूरी पहचान बदल ली थी. वह 'सलीम वास्तिक' बनकर गाजियाबाद के लोनी इलाके में रह रहा था और सोशल मीडिया पर भी सक्रिय था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी कर उसे धर दबोचा. पुलिस के मुताबिक, उसने दशकों तक अपनी असली पहचान छिपाकर रखी थी ताकि वह सजा से बच सके.
इंसाफ की नई उम्मीद
सलीम खान की गिरफ्तारी ने न केवल बंसल परिवार को न्याय की उम्मीद दी है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी भरोसा बढ़ाया है. यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे भरोसे का गला घोंटा गया. अब परिवार और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अपराधी को उसके किए की सख्त से सख्त सजा मिले.
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