बागपत के लूमगा गांव में दो भाइयों की कहानी है जहां बड़ा बेटा मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुआ और छोटे बेटे सोहित चौहान ने भारतीय सेना की अग्निवीर यूनिट में सेवा की. सोहित ने गरीबी को मात देते हुए सेना की वर्दी पहनी. लेकिन अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान पेड़ गिरने से उनकी मृत्यु हो गई. इस घटना ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दी. एक तरफ बड़े भाई की नौकरी की खुशी थी तो दूसरी तरफ छोटे भाई की शहादत का गम. यह कहानी हमारे जवानों की सेवा और उनके परिवारों के बलिदान को दर्शाती है.
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सोहित चौहान तीन ग्रेनेडियर यूनिट के अग्निवीर थे, जिन्हें 2023 में भर्ती किया गया था. परिवार के लिए यह दुःख सहना बेहद कठिन था क्योंकि पिता उस वक्त बड़े बेटे की पासिंग आउट परेड में थे जब उन्हें छोटे बेटे की मृत्यु की खबर मिली. इस परिवार में माता-पिता के अलावा दो बेटे और एक बेटी है. छोटे बेटे को परिवार में बहुत सम्मान और प्यार मिलता था. उनके निधन ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया.
परिवार और क्षेत्र के लोगों ने शहीद को अपनी श्रद्धांजलि दी. सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी परिवार से मिले और मदद का भरोसा दिया. सरकार से परिवार को शहीद का दर्जा देने और आवश्यकता होती पेंशन आदि की मांग की गई. यह दुखद घटना इस बात की याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा के लिए जवानों के परिवार को किस तरह की पीड़ा झेलनी पड़ती है. सोहित की शहादत और मोहित की सेवा की कहानियां हमें प्रेरित करती हैं कि देश की सुरक्षा में परिवारों की कितनी कुर्बानी छुपी होती है. ऐसे परिवारों के प्रति सामाजिक और सरकारी स्तर पर उचित सम्मान और सहायता देना आवश्यक है ताकि उनकी यादें सदैव जीवित रहें.
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