बिकरू कांड से चर्चा में आईं खुशी दुबे अब बनेंगी वकील! यूपी बोर्ड में मिली सफलता के बाद अखिलेश यादव को कहा 'थैंक्यू

बिकरू कांड की आरोपी रहीं खुशी दुबे ने 61% अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास की है. अखिलेश यादव का आभार जताते हुए खुशी ने वकील बनकर पीड़ितों की मदद करने का संकल्प लिया है.

यूपी तक

• 05:42 PM • 24 Apr 2026

follow google news

उत्तर प्रदेश के चर्चित बिकरू कांड के बाद चर्चा में आईं खुशी दुबे ने अपने जीवन की एक नई और सकारात्मक शुरुआत की है. लंबे समय तक कानूनी लड़ाई और जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद, खुशी ने यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी (First Division) में पास कर ली है. उन्होंने 61% अंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला बरकरार रखा जा सकता है.

यह भी पढ़ें...

जेल से 'फर्स्ट डिवीजन' तक का सफर

खुशी दुबे के लिए यह राह आसान नहीं थी. जेल से बाहर आने के बाद उनके सामने कोर्ट केस की पैरवी और बीमार माँ की देखभाल जैसी बड़ी चुनौतियां थीं.

  • देरी की वजह: खुशी ने बताया कि माँ के इलाज और अदालती कार्रवाइयों के चलते उनकी पढ़ाई में काफी अंतराल आ गया था.
  • कड़ी मेहनत: इन तमाम मानसिक और आर्थिक दबावों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए शानदार सफलता हासिल की.

वकील बनकर लड़ेंगी 'न्याय की जंग'

जेल के अनुभव और कानूनी बारीकियों को करीब से देखने के बाद खुशी दुबे के जीवन का लक्ष्य बदल गया है.

  • बदला नजरिया: खुशी पहले डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन अब वे वकील (Lawyer) बनना चाहती हैं.
  • वजह: वे उन लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ना चाहती हैं जो अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस लक्ष्य के लिए उनके वकील शिवाकांत दीक्षित उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं.

अखिलेश यादव का जताया आभार

खुशी दुबे ने अपनी इस जीत के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का विशेष धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि उनकी माँ की गंभीर बीमारी और कई ऑपरेशनों के दौरान अखिलेश यादव और उनकी पार्टी ने न केवल आर्थिक मदद दी, बल्कि मुश्किल वक्त में मानसिक संबल भी प्रदान किया.

संघर्ष और नई मिसाल

खुशी का कहना है कि उन्होंने अपने अनुभवों से मजबूती पाई है. उन्हें उम्मीद है कि उनके ऊपर चल रहे कानूनी मामले जल्द निपट जाएंगे. खुशी की यह कहानी संघर्ष, हिम्मत और दृढ़ संकल्प की एक बड़ी मिसाल है, जो दिखाती है कि जीवन की किसी भी कठिन मोड़ पर एक नई शुरुआत संभव है.