UP ATS की बड़ी कामयाबी! नोएडा से गिरफ्तार हुए पाक समर्थित दो संदिग्ध... हमले की थी साजिश?

उत्तर प्रदेश एटीएस ने नोएडा में तुषार चौहान और समीर खान को गिरफ्तार किया है. ये दोनों पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर हमले की योजना बना रहे थे. जानें इनके खतरनाक मंसूबों का सच.

यूपी तक

• 05:39 PM • 24 Apr 2026

follow google news

उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (UP ATS) ने नोएडा में एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. मेरठ के तुषार चौहान और दिल्ली के समीर खान के रूप में पहचाने गए ये आरोपी पाकिस्तान के कट्टरपंथियों और गैंगस्टरों के सीधे संपर्क में थे और भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे.

यह भी पढ़ें...

पाकिस्तानी गैंगस्टर्स और 'तहरीक-ए-तालिबान' से कनेक्शन

एटीएस की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. आरोपी सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार बैठे अपने हैंडलर्स से निर्देश ले रहे थे:

  • तुषार चौहान (हिजबुल्लाह): मेरठ का रहने वाला तुषार पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी से प्रभावित था. उसने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम 'हिजबुल्लाह' रख लिया था. वह इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के संपर्क में था और उसे ग्रेनेड हमले के लिए फंडिंग भी मिली थी.
  • समीर खान (तहरीक-ए-तालिबान): दिल्ली के रहने वाले समीर खान को कथित तौर पर 'तहरीक-ए-तालिबान' के नाम से काम सौंपा गया था.

संवेदनशील स्थानों पर हमले की थी साजिश

गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्ध सुपारी किलिंग और ग्रेनेड अटैक जैसी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रेरित किए जा रहे थे. इनके निशाने पर संवेदनशील स्थान और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान थे. एटीएस ने इनके पास से अवैध हथियार बरामद किए हैं और 23 अप्रैल को इन्हें गिरफ्तार कर एक संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया.

सोशल मीडिया बना आतंक का हथियार

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कैसे विदेशी आतंकी समूह और कट्टरपंथी यूट्यूबर्स सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं. आरोपियों को ऑनलाइन ही कट्टरपंथी बनाया गया और संवेदनशील डेटा साझा करने के बदले पैसे दिए गए.

UAPA के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने इन दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है. एटीएस अब इन्हें कस्टडी में लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इनके स्थानीय मददगार कौन हैं.