उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से पुलिस कस्टडी में मौत का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. एक नाबालिग के अपहरण के मामले में पकड़े गए आरोपी ने थाने के वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी जान दे दी. इस घटना ने एक बार फिर यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली और कस्टडी में सुरक्षा के दावों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
ADVERTISEMENT
थाने के वॉशरूम में संदिग्ध मौत, आखिर कैसे हुई चूक?
पूरा मामला गाजियाबाद के रहने वाले आरोपी चंद्रपाल से जुड़ा है. एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में पुलिस ने चंद्रपाल को गिरफ्तार किया था. उसे थाने लाकर पूछताछ की जा रही थी, इसी दौरान आरोपी वॉशरूम गया और वहां उसकी मौत हो गई.
इस घटना ने पुलिसिया सुरक्षा को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस की कड़ी निगरानी के बावजूद आरोपी के पास ऐसा सामान (गमछा) कैसे पहुंचा, जिससे उसने यह आत्मघाती कदम उठाया? क्या आरोपी की तलाशी लेने में बड़ी लापरवाही बरती गई थी?
कोतवाली प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है. प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर कोतवाली प्रभारी और एक सिपाही को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. उच्चाधिकारियों ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और थाने के सीसीटीवी फुटेज को भी कब्जे में ले लिया है ताकि मौत की असल वजह और समय का सही पता लगाया जा सके.
कस्टडी में मौत की यह घटना केवल लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह पुलिस की निगरानी प्रणाली की बड़ी विफलता को दर्शाती है. जनता के बीच पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अब इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण और कस्टडी प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
ADVERTISEMENT









