'70 लाख की रिश्वत और स्टिंग का खेल'... आसाराम के खिलाफ पीड़िता के पिता ने क्यों की CBI जांच की मांग?

Shahjahanpur News: शाहजहांपुर पीड़िता के पिता ने आसाराम पर गवाहों को प्रभावित करने और 70 लाख की रिश्वत के जरिए स्टिंग ऑपरेशन करवाने का आरोप लगाया है. उन्होंने हरियाणा सरकार से CBI जांच की मांग की है.

यूपी तक

24 Apr 2026 (अपडेटेड: 24 Apr 2026, 03:04 PM)

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Shahjahanpur News: यौन शोषण मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को मिली अंतरिम पैरोल ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. शाहजहांपुर की पीड़िता के पिता ने जेल से बाहर आए आसाराम पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वह गवाहों को डराने और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नए-नए षड्यंत्र रच रहे हैं. 

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70 लाख की रिश्वत और स्टिंग ऑपरेशन का दावा

पीड़िता के पिता का आरोप है कि पैरोल पर बाहर आते ही आसाराम ने गवाहों के खिलाफ 'स्टिंग ऑपरेशन' का खेल शुरू कर दिया है. उन्होंने हरियाणा के एक गवाह, महेंद्र चावला का उदाहरण देते हुए कहा कि एक महिला सरपंच के जरिए उन्हें 70 लाख रुपये की रिश्वत देकर स्टिंग में फंसाया गया है. पीड़िता के पिता ने सवाल उठाया कि एक महिला सरपंच के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई? उनका सीधा आरोप है कि यह पैसा आसाराम का है और इसकी सीबीआई (CBI) जांच होनी चाहिए.

'झूठे मुकदमों में फंसाकर किया जा रहा परेशान'

पीड़िता के पिता ने अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी आशंका जताई है. उनके मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

  • देशभर में केस: उनका दावा है कि आसाराम की ओर से उनके खिलाफ जम्मू, जोधपुर और दिल्ली जैसे अलग-अलग शहरों में झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं, ताकि उन्हें बार-बार अदालतों और वकीलों के चक्कर काटने पड़ें.
  • वकीलों को प्रभावित करने का शक: उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हाई कोर्ट में हुई बहस के दौरान आसाराम के वकीलों ने 15 दिन तक पक्ष रखा, जबकि उनके वकीलों ने महज 15 मिनट में अपनी बात खत्म कर दी. उन्हें अंदेशा है कि आसाराम ने उनके पक्ष के लोगों या वकीलों को प्रभावित करने की कोशिश की है.
  • यौन शोषण की साजिश: उन्हें डर है कि जिस तरह गवाहों को फंसाया जा रहा है, वैसे ही उन्हें भी किसी झूठे मामले में फंसाया जा सकता है.

न्यायपालिका पर भरोसा, फैसले का इंतजार

तमाम चुनौतियों और डराने-धमकाने के आरोपों के बीच, पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस महीने के अंत तक अदालत अपना अंतिम निर्णय सुना सकती है. पीड़िता के पिता ने सरकार से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाते हुए कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ न्याय के लिए है.