यूपी बोर्ड 2026 के नतीजों में बरेली की नंदिनी गुप्ता ने इंटरमीडिएट में प्रदेश भर में दूसरी रैंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है. लेकिन इस शानदार सफलता के पीछे सिर्फ नंदिनी की 18 घंटे की मेहनत ही नहीं, बल्कि उनके पिता मोहनलाल गुप्ता का एक कड़ा और अनोखा फैसला भी शामिल है.
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जब पिता ने खुद 'खराब' कर दिया घर का टीवी
नंदिनी के पिता ने बताया कि बच्चों का ध्यान पढ़ाई से न भटके, इसके लिए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया. घर में छोटे बच्चे होने के कारण टीवी अक्सर चलता रहता था, जिससे नंदिनी की एकाग्रता भंग होती थी. अपनी बेटी को टॉपर बनाने के संकल्प के साथ पिता ने घर के टीवी को जानबूझकर खराब कर दिया ताकि घर में केवल पढ़ाई का माहौल बना रहे. यह फैसला नंदिनी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
प्रतिदिन 18 घंटे की पढ़ाई और पारिवारिक त्याग
नंदिनी ने अपनी इस उपलब्धि के लिए कड़ी तपस्या की है. उनके संघर्ष की कुछ खास बातें:
- कठिन परिश्रम: नंदिनी प्रतिदिन करीब 18 घंटे पढ़ाई को देती थीं.
- कामों से मुक्ति: परिवार ने नंदिनी को घर के सभी कामकाज से पूरी तरह मुक्त रखा, ताकि उनका पूरा समय और ऊर्जा सिर्फ किताबों और रिवीज़न पर केंद्रित रहे.
- अनुशासन और एकाग्रता: टीवी और मोबाइल जैसे 'डिस्ट्रैक्शन' को दूर कर परिवार ने नंदिनी के लिए एक आदर्श स्टडी एनवायरनमेंट तैयार किया.
सफलता का मंत्र: मेहनत और सही माहौल
नंदिनी की कहानी यह साबित करती है कि किसी भी बच्चे की सफलता केवल उसकी अपनी मेहनत पर निर्भर नहीं करती. इसमें परिवार का मार्गदर्शन और सही वातावरण बेहद महत्वपूर्ण होता है. मोहनलाल गुप्ता के इस फैसले ने दिखाया कि अगर माता-पिता बच्चों के भविष्य के लिए छोटे-छोटे सुखों का त्याग करें, तो परिणाम ऐतिहासिक हो सकते हैं.
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