मैं उसके बगैर जी नहीं सकती...पालतू डॉग मोंटी के लिए परेशान हुई फरहा, फिर कानपुर DM जितेंद्र सिंह ने की ये मदद

कानपुर में फरहा को उसके आठ महीने के पालतू डॉगी मोंटी को वापस मिलने की राहत मिली. डीएम जितेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर चार घंटे में मोंटी फरहा के पास लौटाया गया.

रंजय सिंह

• 02:06 PM • 08 Jan 2026

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उत्तर प्रदेश के कानपुर में मानवता और पालतू प्रेम की मिसाल देखने को मिली, जब फरहा नामक महिला को उसके आठ महीने के पालतू डॉगी मोंटी वापस मिल गया. बता दें कि फरहा ने अपने पालतू डॉगी मोंटी को वापस पाने के लिए सीधे डीएम ऑफिस जाकर फरियाद की. फरहा ने कहा कि “सर, मेरा मोंटी मुझे दिलवा दीजिए, मैं उसके बगैर जी नहीं सकती.” ये सुनते ही डीएम जितेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और सिर्फ चार घंटे में मोंटी फरहा के गोद में वापस पहुंच गया. यह मामला इसलिए और भी सनसनीखेज बन गया क्योंकि हाल ही में लखनऊ में दो बहनों ने अपने पालतू डॉगी के कारण कथित तौर पर फिनायल पीकर आत्महत्या कर ली थी.

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क्या है पूरा मामला?

कानपुर के आवास विकास क्षेत्र की रहने वाली फरहा ने 18 दिसंबर को बाहर जाते समय अपना पालतू डॉगी मोंटी एक डॉग केयर सेंटर को सौंपा था. उस वक्त मोंटी आठ महीने का था और कुछ घायल भी था. जब फरहा लौटकर आई तो सेंटर वाले ने उसे यह कहकर डॉगी देने से इनकार कर दिया कि फरहा ने मोंटी की देखभाल ठीक से नहीं की है और कहा कि उन्होंने मोंटी को SPCA को सौंप दिया है. यह संस्था पालतू जानवरों के साथ क्रूरता  करने वालों से पालतू जानवरों को लेकर उनकी केयर करती है. इस संस्था के अध्यक्ष जिले के डीएम होते हैं.

फरहा कई बार डॉग को वापस पाने के लिए दौड़ी लेकिन जब उसे कोई राहत नहीं मिली तो उसने बुधवार को सीधे डीएम जितेंद्र कुमार सिंह के ऑफिस पहुंचकर अपनी फरियाद रखी. 

डीएम ने तुरंत की कार्रवाई

डीएम जितेंद्र कुमार सिंह को लखनऊ में दो बहनों के डॉगी न मिलने पर कथित तौर पर आत्महत्या करने की घटना की जानकारी थी, जिसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत जिले के पशु अधिकारी को जांच का आदेश दिया. जांच के दौरान फरहा के पास मौजूद वैधानिक कागजात की समीक्षा की गई और डॉगी मोंटी का स्वामित्व प्रमाणित किया गया. साथ ही, एनपीसीए संस्था के कामकाज और उनके अधिकारों की भी समीक्षा की गई. डीएम ने स्पष्ट किया कि एनपीसीए का उद्देश्य केवल पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकना है, न कि किसी लीगल ओनर के पालतू डॉगी को रोकना. 

मोंटी को वापस पाने की प्रक्रिया

डीएम के आदेश पर जिला पशु अधिकारी आइडीएन चतुर्वेदी तुरंत संस्था पहुंचे और पूरे मामले की जांच की. फरहा के वैधानिक कागजात सही पाए जाने के बाद चार घंटे के भीतर मोंटी फरहा को सौंप दिया गया. 15 दिनों से अपने डॉगी के वियोग में परेशान फरहा ने मोंटी को गोद में पाकर डीएम की मानवी पहल के लिए धन्यवाद दिया. 

डीएम ने कही ये बात 

कानपुर डीएम ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों के काटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं और कुछ में जान भी जा चुकी है. ऐसे हालात में जिनके पास डॉगी रखने का वैध लाइसेंस है, उनका डॉगी किसी भी समिति या संस्था के लिए खतरा नहीं है. इसलिए ऐसे पालतू डॉगी को रोकना उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई मानवता और लॉ के अनुसार की गई, ताकि पालतू डॉगी के प्रेमी नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए.

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