UP News: एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक जानलेवा हमले के बाद रिकवर कर रहे हैं. इसकी जानकारी उनके सोशल मीडिया अकाउंट से दी गई थी. बीती 27 फरवरी को दो हेलमेट पहने हमलावरों ने गाजियाबाद स्थित उनके घर में बने छोटे ऑफिस में घुसकर गले और पेट पर कई बार चाकू से वार किए थे. सलीम को गंभीर हालत में पहले स्थानीय अस्पताल, फिर दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में भर्ती कराया गया. यह हमला सलीम के इस्लाम और कट्टरपंथी विचारधाराओं पर खुली आलोचना के कारण माना जा रहा है। यह 'सर तन से जुदा' स्टाइल किया गया हमला है.
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दरअसल कट्टरपंथी ताकतों का मकसद सलीम की जुबान बंद करना था, लेकिन परिणाम उल्टा हुआ. हमले के बाद उनके पुराने वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. लोग उनके सटीक विश्लेषण, तर्कपूर्ण बहस और इस्लाम की कुछ प्रथाओं पर सवालों को दोबारा देख और शेयर कर रहे हैं. यह घटना उदारवादी मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत का प्रतीक बन गई है. दुनिया में कट्टरपंथ कितनी भी हिंसा कर ले, लेकिन सच्चाई और सवाल उठाने की ताकत कम नहीं होती-यह हमले ने साबित कर दिया.
सोशल मीडिया पर बढ़ रहे फॉलोवर्स
हमले से पहले सलीम वास्तिक के मुख्य यूट्यूब चैनल "Saleem Vastik 0007" पर करीब 28,000 सब्सक्राइबर्स थे. चैनल पर 179 वीडियोज़ अपलोड थे, और वे नियमित रूप से धार्मिक सुधार, इस्लाम की आलोचना और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते थे. हमले के बाद चैनल पर सब्सक्राइबर्स की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है. रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया अपडेट्स के अनुसार, अब यह संख्या 32,000 से अधिक पहुंच गई है. यह आंकड़ा हमले के तुरंत बाद के दिनों में ही आया, क्योंकि वायरल वीडियोज और समर्थन की लहर ने नए दर्शकों को आकर्षित किया.
फेसबुक पर भी उनकी पेज या संबंधित पोस्ट्स में फॉलोअर्स और एंगेजमेंट में उछाल आया है. हमले से जुड़ी पोस्ट्स पर हजारों लाइक्स, शेयर्स और कमेंट्स आए, जिसमें लोग उनकी रिकवरी की कामना कर रहे हैं और उनके विचारों से सहमत जाहिर कर रहे हैं. फेसबुक पर उनकी प्रोफाइल या सपोर्ट पेज पर फॉलोअर्स की संख्या में भी इजाफा हुआ है. कुल मिलाकर, हमला उनकी पहुंच को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ-जो कट्टरपंथियों के लिए सबसे बड़ा झटका है.
विचारों को हिंसा से नहीं मारा जा सकता
सलीम वास्तिक की कहानी बताती है कि हिंसा से विचार नहीं मरते, बल्कि वे और मजबूत होकर उभरते हैं. भारत में बड़ी संख्या में लोग ऐसी आवाजों का समर्थन कर रहे हैं जो कट्टरता पर सवाल उठाती हैं. उनकी रिकवरी की कामना के साथ, यह घटना याद दिलाती है कि अभिव्यक्ति की आजादी और उदारवादी मूल्य हमेशा जीतते हैं, चाहे कितनी भी ताकत क्यों न लगाई जाए. सलीम की आवाज़ अब पहले से कहीं ज्यादा गूंज रही है, और यही सबसे बड़ा जवाब है.
डिस्क्लेमर: यह खबर प्रचार-प्रसार विभाग के सौजन्य से है.
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