1983 से अब तक कुछ नहीं बदला...झांसी के इस गांव में आज भी पानी के लिए जान जोखिम में डाल रहे लोग

Jhansi Water Crisis: झांसी के डिमरापुरवा गांव में दशकों से गंभीर पानी संकट बना हुआ है. ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए 1–1.5 किलोमीटर दूर जंगलों तक जाना पड़ता है, जिससे उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है. स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं मिला.

यूपी तक

• 05:04 PM • 27 May 2026

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Jhansi Water Crisis: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मोंठ तहसील क्षेत्र के डिमरापुरवा गांव से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहां ग्रामीण आज भी पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से हालात नहीं बदले हैं और आज भी उन्हें पानी के लिए कई किलोमीटर दूर जंगलों में जाना पड़ता है. इस दौरान न केवल गर्मी की मार झेलनी पड़ती है बल्कि जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है.

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दशकों पुरानी समस्या और बदहाल हालात

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1983 में बाढ़ के बाद उन्हें इस क्षेत्र में बसाया गया था, लेकिन उसके बाद से आज तक गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है. लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं. स्थिति यह है कि गांव में न तो पाइपलाइन की उचित व्यवस्था है, न ही पर्याप्त हैंडपंप और न ही नियमित पानी की सप्लाई.

पानी के लिए जान जोखिम में डालते ग्रामीण

ग्रामीणों की परेशानी इतनी गंभीर है कि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे तक लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर दूर जंगलों में जाकर पानी भरने को मजबूर हैं. तेज गर्मी में तापमान 47 डिग्री तक पहुंचने के बीच यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है. लोगों का कहना है कि कई बार पानी लाते समय गिरकर चोट लग जाती है, हाथ-पैर टूटने की घटनाएं भी हुई हैं और जंगली जानवरों के डर से लोग भयभीत रहते हैं. कई बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और कई दिन तक नहाने तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है.

प्रशासन पर सवाल और ग्रामीणों की नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद आज तक स्थायी समाधान नहीं किया गया. प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं. लोगों का कहना है कि गांव में पानी की टंकी होने के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं होती और किसी भी तरह की प्रभावी जल व्यवस्था मौजूद नहीं है. ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच उनका गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित है.

विकास के दावों पर उठे सवाल

यह पूरा मामला सरकार की विकास योजनाओं और “हर घर जल” जैसे अभियानों पर भी सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर झांसी मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित गांव की यह हालत है, तो दूरदराज के इलाकों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. ऐसे में करोड़ों रुपये के बजट और योजनाओं का लाभ आखिर ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है.

प्रशासन का पक्ष और आगे की उम्मीद

मामले पर अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों को संज्ञान में लिया गया है और जांच के लिए टीम भेजी गई है. संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द निरीक्षण कर समस्या का समाधान किया जाए. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है ताकि उन्हें पानी के लिए रोजाना संघर्ष न करना पड़े.

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