Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की टहरौली तहसील के बंगरी बंगरा गांव में श्मशान घाट पर टिन शेड न होने के कारण एक गरीब शख्स का अंतिम संस्कार भारी बारिश के बीच तिरपाल के नीचे करना पड़ा है. जिंदगी भर बीमारियों और तंगहाली से जूझने वाले इस शख्स को मौत के बाद भी सुकून की दो गज जमीन नहीं मिली. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
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कैंसर से जंग हार गए ओमप्रकाश
यह दुखद मामला बंगरी बंगरा गांव के रहने वाले 40 साल के ओम प्रकाश अहिरवार का है. ओम प्रकाश लंबे समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और भूमिहीन है. लंबी बीमारी के कारण परिवार का सब कुछ खत्म हो गया था और वे दाने-दाने को मोहताज हो गए थे. आखिरकार ओम प्रकाश जिंदगी की जंग हार गए और दुनिया से चले गए. वह अपने पीछे एक 8 साल का मासूम बेटा और दो बेटियों को छोड़ गए हैं, जिनका भविष्य अब पूरी तरह अंधकार में है.
भारी बारिश और बदहाल श्मशान घाट
ओम प्रकाश की मौत के बाद जब परिजन और ग्रामीण उनके शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे, तो अचानक आसमान से तेज बारिश होने लगी. एक तरफ जहां परिवार अपने मुखिया को खोने के गम में डूबा था, वहीं दूसरी तरफ श्मशान घाट पर सिर छुपाने की कोई जगह नहीं थी. गांव के इस श्मशान घाट पर न तो कोई टिन शेड बना हुआ था और न ही पानी से बचने का कोई दूसरा इंतजाम था. श्मशान घाट की इस बदहाली ने सरकार के विकास के तमाम दावों को पूरी तरह तार-तार कर दिया.
तिरपाल के साए में अंतिम विदाई
बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, इसलिए ग्रामीणों ने आनन-फानन में एक तिरपाल का इंतजाम किया. चिता की आग को बुझने से बचाने के लिए गांव के कई लोग तेज बारिश के बीच अपने हाथों में तिरपाल पकड़कर खड़े रहे. इसी बेहद मुश्किल परिस्थिति के बीच ओम प्रकाश के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया और उन्हें अंतिम विदाई दी गई. इस झकझोर देने वाले दृश्य को देखकर हर किसी का कलेजा कांप गया. अब ग्रामीण इस लापरवाही के खिलाफ प्रशासन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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