Chandrashekhar Azad: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को समर्थन देने के लिए भीम आर्मी के नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद पहुंचे हैं. चंद्रशेखर आजाद के पहुंचते ही वहां मौजूद भीड़ ने 'जय भीम' के नारे लगाकर उनका जोरदार स्वागत किया. मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को खुला चैलेंज दिया. उन्होंने एलान किया कि वह 20 जुलाई को आंदोलनकारियों के साथ जंतर-मंतर से संसद तक एक विशाल मार्च निकालेंगे. उन्होंने कहा कि या तो सरकार 19 जुलाई को हार मानेगी या फिर 20 जुलाई को हम इस तानाशाह हुकूमत को हरा देंगे.
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20 जुलाई को संसद मार्च
चंद्रशेखर आजाद ने मंच से घोषणा की कि वह 20 जुलाई को संसद कूच करेंगे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह कोई बात हवा में नहीं कहते, 20 तारीख को यहां से संसद तक सिर्फ आदमी ही आदमी नजर आएगा. उन्होंने साफ किया कि इस आंदोलन में महापुरुषों की तस्वीरों के अलावा किसी भी पार्टी का झंडा नहीं होगा, क्योंकि उन्हें इस आंदोलन से कोई राजनीतिक लाभ नहीं चाहिए. आजाद ने यह भी बताया कि उन्होंने सोनम वांगचुक को अनशन त्यागने का संदेश भेजा था क्योंकि देश और युवाओं को उनकी जरूरत है, लेकिन उनके मना करने के बाद अब वह उनसे अनशन छोड़ने को नहीं कहेंगे.
शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना
आंदोलन के मंच से देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी तीखा हमला बोला गया. चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर आप कुर्सी पर बैठकर कुछ कर नहीं सकते और देश के युवाओं का भविष्य नहीं बना सकते, तो आप कुर्सी छोड़ क्यों नहीं देते. जब देश के युवाओं को आप जैसा शिक्षा मंत्री चाहिए ही नहीं, तो आप इस पद से क्यों चिपक कर बैठे हैं. इसी दौरान वहां मौजूद युवाओं ने प्रदर्शनकारियों पर लगने वाले फंडिंग के आरोपों पर तंज कसा. उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान, जॉर्ज सोरोस और सीआईए से फंड आ चुका है और बस पीएम से आना बाकी है.
फटी शर्ट पहनकर जाएंगे संसद
चंद्रशेखर आजाद ने अपने साथ हुई पुलिसिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए सत्ता पर निशाना साधा. उन्होंने बताया कि जब वह पहले जा रहे थे तो पुलिस के भाइयों ने उनकी शर्ट फाड़ दी थी. उन्होंने संकल्प लिया कि वह 20 जुलाई को उसी फटी हुई शर्ट पहनकर देश की संसद तक जाएंगे. आजाद ने कहा कि वह संसद में यह बताने नहीं जा रहे हैं कि उन्हें लाठी लगी है या उनकी शर्ट फटी है, बल्कि वह यह दिखाने जा रहे हैं कि मौजूदा सत्ता कितनी तानाशाह हो चुकी है. यह सरकार इतनी बहरी है कि न तो 3 किलोमीटर की आवाज सुनती है और न ही 300 किलोमीटर की आवाज सुनती है.
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