कौन हैं साउथ इंडिया से यूपी आकर फर्राटेदार अवधी बोलने वाली लेडी डॉक्टर? पेटवा पिरात है... सुनकर आता है मजा

अंचल श्रीवास्तव

• 05:59 PM • 03 Sep 2026

कर्नाटक के मंगलूर की रहने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा आज उत्तर प्रदेश के गोंडा में फर्राटेदार अवधी बोलती हैं. गोंडा आने के बाद महिला मरीजों से बेहतर संवाद के लिए उन्होंने पहले हिंदी और फिर अवधी सीखी.

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जिसकी मातृभाषा कन्नड़ हो, वह फर्राटेदार अवधी बोले तो सुनने वाले भी हैरान रह जाते हैं. उत्तर प्रदेश के गोंडा में ऐसी ही कहानी सामने आई है स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा की. मूल रूप से कर्नाटक के मंगलूर की रहने वाली डॉ. अनीता अब गोंडा में न सिर्फ अपना अस्पताल चला रही हैं, बल्कि मरीजों से उनकी अपनी भाषा यानी अवधी में ही बात करती हैं.

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डॉ. अनीता के लिए अवधी सिर्फ मरीजों से बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि उन्हें यह भाषा बेहद खूबसूरत और ‘म्यूजिकल’ लगती है. यही वजह है कि गोंडा आने के बाद भाषा की परेशानी को उन्होंने चुनौती माना और धीरे-धीरे हिंदी के साथ अवधी भी सीख ली. आज महिला मरीज उनसे बेझिझक अपनी परेशानी अवधी में बताती हैं और डॉक्टर भी उसी अंदाज में उनकी बात समझती हैं.

कर्नाटक की बेटी, गोंडा की बहू

डॉ. अनीता मिश्रा मूल रूप से कर्नाटक के मंगलौर जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता बिजनेस मैन हैं और परिवार कन्नड़ भाषा बोलता है. साल 1997 में जब अनीता मणिपाल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की फर्स्ट ईयर की छात्रा थीं, तभी उनकी मुलाकात गोंडा निवासी और उनसे दो साल सीनियर पूर्णोदय मिश्रा से हुई.

दोनों की मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल गई और 1997 में ही दोनों ने शादी कर ली. साल 2000 में अनीता ने राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से एमएस किया. इसके बाद वह अपने पीहर कर्नाटक से उत्तर प्रदेश के गोंडा स्थित ससुराल आ गईं.

गोंडा आईं तो सामने खड़ी थी भाषा की चुनौती

गोंडा आने के बाद डॉ. अनीता के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाषा की थी. उन्होंने पहले हिंदी सीखी और धीरे-धीरे इसमें पारंगत हो गईं. साल 2005 में डॉक्टर दंपती ने गोंडा नगर में अपना निजी नर्सिंग होम खोला और दोनों ने अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी, लेकिन यहां एक और परेशानी सामने आई. 

गोंडा की ज्यादातर महिला मरीज अपनी बीमारी और तकलीफ अवधी में बताती थीं. मरीजों की बात समझना डॉ. अनीता के लिए शुरुआत में आसान नहीं था. उन्होंने समस्या का रास्ता निकाला और खुद अवधी सीखना शुरू कर दिया.

धीरे-धीरे अवधी पर उनकी पकड़ मजबूत होती गई. फिर वह मरीजों से उन्हीं की भाषा में बात करने लगीं. इसका फायदा हुआ कि महिला मरीज उनके सामने अपनी परेशानी ज्यादा सहजता से बताने लगीं और डॉक्टर के साथ उनका जुड़ाव भी मजबूत हो गया.

‘पेटवा पिरात है... कनवा कुकुआत है’, सुनकर डॉक्टर को क्यों मजा आता है?

डॉ. अनीता मिश्रा बताती हैं कि जब मरीज अवधी में अपनी परेशानी बताती हैं तो उन्हें यह भाषा बहुत ‘म्यूजिकल’ लगती है. मरीज जब कहती हैं- ‘पेटवा पिरात है’, ‘कनवा कुकुआत है’ या ‘गटईवा खासखसात है’, तो उन्हें सुनने में बहुत अच्छा लगता है.

उनके मुताबिक अवधी बोलने का अंदाज बेहद खास है. शायद यही वजह है कि अब कर्नाटक की कन्नड़ भाषी बेटी गोंडा में अवधी बोलते हुए बिल्कुल स्थानीय नजर आती हैं.

कत्थक का भी शौक, सोशल मीडिया पर बनाती हैं रील

डॉक्टर अनीता मिश्रा को कत्थक नृत्य का भी शौक है. वह अक्सर अपनी रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं, जो वायरल भी होती हैं. डॉ. अनीता बताती हैं कि वह बीते वर्षों में मिसेज इंडिया और मिसेज एशिया भी बन चुकी हैं. डॉक्टर दंपती का एक बेटा भी है, जो राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है.

कर्नाटक से गोंडा तक का डॉ. अनीता मिश्रा का सफर सिर्फ शादी और शहर बदलने की कहानी नहीं है. यह उस लगाव की कहानी भी है, जिसमें एक डॉक्टर ने अपने मरीजों को बेहतर समझने के लिए उनकी भाषा सीखी और फिर उसी भाषा को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया.