Gonda Manorama River Revival: ‘मन की बात’ में गूंजी मनोरमा नदी की कहानी, PM मोदी ने सराहा गोंडा-बस्ती के युवाओं का अभियान

Gonda News: मनोरमा नदी पुनर्जीवन अभियान ने जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक उदाहरण पेश किया है. वर्षों की मेहनत से स्वच्छ हुई नदी की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में इस पहल का उल्लेख कर युवाओं, स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की सराहना की.

PM Modi on Gonda Manorama River

Newzo

• 05:28 PM • 01 Jun 2026

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Gonda News: यह क्षेत्र के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मनोरमा (मनवर) नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन अभियान का उल्लेख किया. गोंडा जिले के इटियाथोक स्थित तिर्रे ताल से निकलने वाली यह ऐतिहासिक नदी पण्डरी कृपाल, मुजेहना और मनकापुर विकास खंड से होकर बस्ती जिले के समीप कुआनो नदी में मिलती है.

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प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में बस्ती के युवा आकाश गुप्ता और उनके साथियों की सराहना की, जिन्होंने वर्षों से कचरे, जलकुंभी और प्लास्टिक से जकड़ी मनोरमा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने का संकल्प लिया. उनके प्रयासों से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे जनआंदोलन में बदल गया, जिसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के साथ प्रशासन का सहयोग भी जुड़ता गया.

वर्ष 2019 में गोंडा संसदीय क्षेत्र में भी मनोरमा नदी के संरक्षण एवं सफाई अभियान की शुरुआत की गई थी. कोरोना काल के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से गोंडा जनपद में नदी के लगभग 44 किलोमीटर हिस्से का जीर्णोद्धार कराया गया, जिससे अल्प समय में ही नदी का स्वरूप बदल गया और उसमें पुनः जीवन का संचार हुआ.इसके अतिरिक्त, वन महोत्सव के दौरान इटियाथोक क्षेत्र की सिसई बहलोलपुर ग्राम पंचायत में मनोरमा नदी के तट पर 15 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया, जिसने नदी संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन को भी नई मजबूती प्रदान की.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि देश की छोटी नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी की सामूहिक शक्ति से ही संभव है। मनोरमा नदी का पुनर्जीवन अभियान इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब समाज और शासन मिलकर कार्य करते हैं, तो प्रकृति को नया जीवन मिल सकता है. मनोरमा नदी की स्वच्छ धारा, लौटते पक्षियों की चहचाहट और हरित वातावरण आज इस सफल जनअभियान की कहानी स्वयं बयां कर रहे हैं. यह अभियान पूरे देश के लिए प्रेरणा है कि “शिकायत नहीं, शुरुआत” ही बदलाव का सबसे प्रभावी मंत्र है.