नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर चल रहे मजदूर आंदोलन ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है. समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा मजदूरों के समर्थन में भेजे गए एक उच्चस्तरीय डेलिगेशन को पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.
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भारी पुलिस बल की तैनाती और 'नजरबंदी' का आरोप
मजदूरों पर हुए लाठीचार्ज और उनकी गिरफ्तारी के बाद स्थिति का जायजा लेने जा रहे सपा डेलिगेशन को रोकने के लिए नोएडा पुलिस ने धारा 163 (पूर्व में धारा 144) का हवाला देते हुए भारी घेराबंदी की. नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल मजदूरों से मिलने जा रहा था, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी. समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार तानाशाही पर उतारू है और उनके नेताओं को घरों पर 'नजरबंद' कर उत्पीड़न का प्रयास किया जा रहा है.
'लोकतंत्र की अवहेलना कर रही सरकार'
सपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पीड़ित मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया और संवाद का रास्ता नहीं खोला, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण कर सकता है.
तनावपूर्ण बनी हुई है स्थिति
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फिलहाल भारी पुलिस बल तैनात है. एक ओर जहां प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों की मांगों और राजनीतिक हस्तक्षेप ने माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है.
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