नोएडा में हाल ही में हुए बवाल के पीछे पुलिस अब एक गहरी डिजिटल साजिश की जांच कर रही है. पुलिस का मानना है कि शहर में तनाव अचानक नहीं फैला, बल्कि इसे एक सोची-समझी योजना के तहत हवा दी गई. इस मामले में आरजेडी प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अफवाहें फैलाईं, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई.
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डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश?
जांच के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि विवाद बढ़ने के बाद कई सोशल मीडिया पोस्ट अचानक डिलीट कर दिए गए. पुलिस इसे डिजिटल सबूतों को मिटाने की कोशिश के तौर पर देख रही है. हालांकि, साइबर एक्सपर्ट्स को कई ऐसे अहम सुराग मिले हैं जिनसे यह साफ हो रहा है कि कौन, कब और किस तरह का कंटेंट पोस्ट कर रहा था. पुलिस इन 'डिजिटल ट्रेल' के जरिए साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है.
क्या यह एक 'कोऑर्डिनेटेड' हमला था?
पुलिस जांच के मुताबिक, यह मामला सिर्फ कुछ गलत वीडियो शेयर करने तक सीमित नहीं है. अलग-अलग सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट में एक ही तरह की भाषा और पैटर्न देखने को मिला है, जो इस आशंका को मजबूत करता है कि यह एक संगठित प्रयास (Organized Effort) था. अधिकारी अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या इन सभी हैंडल्स को कहीं एक जगह से निर्देश मिल रहे थे.
गिरफ्तारी की लटकी तलवार
पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. सूत्रों की मानें तो सबूतों के आधार पर प्रियंका भारती और कंचना यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और उनकी गिरफ्तारी की भी संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल एक पूरे शहर की शांति को खतरे में डाल सकता है.
अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस डिजिटल साजिश के पीछे के असली चेहरों का पर्दाफाश कब होगा और कानून का शिकंजा कसने के बाद क्या नए खुलासे होंगे.
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