Noida Violence Update: नोएडा पुलिस ने 13 अप्रैल 2026 को हुई फैक्ट्री हिंसा के पीछे की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने का दावा है. पुलिस ने जांच के बाद दावा है कि यह हिंसा कोई अचानक हुआ विरोध नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए बुना गया एक सुनियोजित पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा था. मुख्य आरोपी रूपेश राय और उसके साथियों को सेक्टर 39 पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
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पाकिस्तानी हैंडल्स से 'रिमोट कंट्रोल' हुई हिंसा
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पाकिस्तानी कनेक्शन को लेकर हुआ है. पुलिस ने दो ऐसे सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान की है, जो पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे. इन हैंडल्स के जरिए मजदूरों के बीच आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी फैलाकर उन्हें उकसाया गया. वॉट्सऐप पर क्यूआर कोड के जरिए गुप्त ग्रुप बनाए गए और देखते ही देखते हजारों मजदूरों को इस साजिश का हिस्सा बना लिया गया.
साजिश का 'डिजिटल' पैटर्न: व्हाट्सएप चैट्स ने खोले राज
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने पुलिस को हैरान कर दिया है. जांच में तीन संगठित समूहों की सक्रिय भूमिका सामने आई है, जिनका मकसद केवल विरोध करना नहीं बल्कि औद्योगिक शांति को भंग करना था.
- भ्रामक सूचना: मजदूरों को वेतन और सुविधाओं को लेकर गलत तथ्य दिए गए.
- संगठित नेटवर्क: 'बिगुल' जैसे नेटवर्कों और बाहरी तत्वों ने फैक्ट्रियों के बाहर जाकर जबरन काम बंद कराया.
- आगजनी की योजना: पकड़े गए आरोपियों में से कई सीधे तौर पर आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल पाए गए हैं.
62 गिरफ्तारियां और 13 मुकदमे दर्ज
पुलिस ने इस मामले में अब तक 13 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं और कुल 62 उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेजा है. पुलिस का मानना है कि हिंसा भड़काने वाले असली चेहरे मजदूर नहीं, बल्कि वे बाहरी तत्व थे जो पर्दे के पीछे से इस नेटवर्क को चला रहे थे.
इस घटना के बाद प्रशासन और फैक्ट्री मालिकों ने समन्वय बिठाकर मजदूरों की सैलरी बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में असंतोष की कोई गुंजाइश न रहे. पुलिस अब उन सभी 70 संदिग्ध हैंडल्स की तह तक जाने में लगी है, जिन्होंने वीपीएन (VPN) के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर एक औद्योगिक शहर की सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है.
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