उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-57 औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक कंपनी के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया. आक्रोशित श्रमिकों ने कंपनी की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया, शीशे तोड़ दिए और पथराव किया. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को दखल देना पड़ा, लेकिन कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखी भिड़ंत भी देखने को मिली.
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सैलरी और खर्च के बीच 'असंतुलन' बना वजह
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ कहना है कि वर्तमान में उन्हें मिलने वाला वेतन बेहद कम है. कमरतोड़ महंगाई और घरेलू खर्चों के बीच संतुलन न बैठ पाने के कारण उन्हें परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है. कर्मचारी न्यूनतम वेतन में सम्मानजनक वृद्धि और कार्यस्थल पर बेहतर स्थितियों की मांग कर रहे हैं. श्रमिकों का तर्क है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को उठा रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा.
डंडे लेकर डटे रहे कर्मचारी, कंपनी में तोड़फोड़
सेक्टर-57 की इस कंपनी के बाहर प्रदर्शनकारी डंडे लेकर खड़े नजर आए. उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अपना विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ बंद नहीं करेंगे. गुस्से में आए कर्मचारियों ने कंपनी के शीशे तोड़ डाले और पथराव कर संपत्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया.
पुलिस से भिड़ंत और तनावपूर्ण माहौल
सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. हालांकि, प्रदर्शनकारियों के उग्र रवैये के कारण पुलिस से भी उनकी भिड़ंत हुई. काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने स्थिति को सँभालने की कोशिश की, लेकिन पूरे इलाके में तनाव बरकरार है.
संवाद ही एकमात्र समाधान
क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अब प्रशासन और कंपनी प्रबंधन का कर्मचारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना आवश्यक हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बातचीत और ठोस समाधान के जरिए ही हिंसा को रोका जा सकता है और औद्योगिक क्षेत्र में बेहतर कामकाजी माहौल बनाया जा सकता है.
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