नोएडा के सेक्टर-126 थाना क्षेत्र (सेक्टर-94) से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. यहां एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे एक खुले गड्ढे में डूबने से मौत हो गई. हर्षित अपने दोस्तों के साथ परीक्षा खत्म होने की खुशी में पार्टी करने निकला था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही ने इस खुशी को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया.
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परीक्षा के बाद पार्टी और फिर दर्दनाक हादसा
गाजियाबाद का रहने वाला हर्षित भट्ट बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (सिक्स्थ सेमेस्टर) का छात्र था. जानकारी के मुताबिक, सेमेस्टर एग्जाम खत्म होने के बाद हर्षित अपने दोस्तों के साथ सेक्टर-94 के पास पिकनिक मनाने गया था. मस्ती के दौरान छात्र पास ही में बने एक गहरे गड्ढे में भरे पानी में नहाने के लिए कूद गए. इसी दौरान हर्षित गहरे पानी में समाने लगा. दोस्तों ने उसे बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे.
रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर विभाग, SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं. भारी मशक्कत के बाद हर्षित को निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. अन्य छात्रों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. एडिशनल डीसीपी ने बताया कि छात्र परीक्षा के बाद यहां पार्टी करने आए थे और उसी दौरान यह हादसा हुआ. पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है.
सिस्टम पर सवाल, आखिर कब तक?
यह मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही है. सवाल उठता है कि:
- महीनों से खुला यह गड्ढा आखिर क्यों नहीं भरा गया?
- खतरनाक स्थान होने के बावजूद वहां बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं था?
- जनवरी में ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की ऐसी ही मौत के बाद भी सबक क्यों नहीं लिया गया?
एक और 'चिराग' बुझा, जवाबदेही किसकी?
हर्षित अपने माता-पिता का सहारा था, जो अब हमेशा के लिए छिन गया है. नोएडा में खुले नाले और गड्ढे लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं. हर हादसे के बाद जांच और वादों का दौर चलता है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रहती है. हर्षित की मौत ने एक बार फिर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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