Pilibhit DM Threat: 'मंडी आया तो मारूंगा'... कहकर किसान नेता बलजिंदर सिंह ने डीएम को दी धमकी, फिर ये सब हुआ

Pilibhit DM Threat: पीलीभीत में गेहूं खरीद न होने से नाराज किसान नेता बलजिंदर सिंह ने डीएम को धमकी दी. गिरफ्तारी के बाद किसान नेता ने माफी मांगी है, लेकिन मंडी में तनाव बरकरार है.

यूपी तक

• 07:11 PM • 08 Apr 2026

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Pilibhit DM Threat: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में गेहूं की सरकारी खरीद न होने से नाराज एक किसान नेता को जिलाधिकारी को फोन पर धमकी देना भारी पड़ गया. पूरनपुर मंडी के किसान नेता बलजिंदर सिंह ने आवक और खरीद की समस्याओं को लेकर डीएम को फोन किया था, जिसमें उन्होंने मर्यादित भाषा की सीमा लांघते हुए उन्हें 'घेराव करने और देख लेने' की धमकी दे डाली. प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है.

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ऑडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप, आरोपी गिरफ्तार

किसान नेता और जिलाधिकारी के बीच हुई बातचीत का यह ऑडियो प्रशासनिक हलकों और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. ऑडियो में सुनाई दे रही धमकी के बाद पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी बलजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. हालांकि, जेल जाने के बाद किसान नेता का रुख नरम पड़ा और उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी गलती स्वीकार करते हुए प्रशासन से माफी मांगी है.

गेहूं खरीद में देरी बनी विवाद की जड़

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह गेहूं की सरकारी खरीद समय पर न होना है. पूरनपुर मंडी में किसान अपनी फसल लेकर खड़े हैं, लेकिन खरीद की सुस्त रफ्तार के कारण उनकी फसल की कीमतों में गिरावट आ रही है. किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है. इसी हताशा और आक्रोश में किसान नेता ने आपा खो दिया और विवाद बढ़ गया.

मंडी पहुंचे अधिकारी, किसानों ने घेरा

विवाद के बीच जिलाधिकारी और पुलिस के आला अधिकारी खुद स्थिति का जायजा लेने मंडी पहुँचे. वहां पहले से ही बड़ी संख्या में किसान और समर्थक जमा थे. किसानों ने दोटूक कहा कि वे अपनी फसलों की उचित कीमत और तत्काल खरीद के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. किसान नेताओं का कहना है कि यदि जेल जाने से किसानों की समस्याएं हल होती हैं, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं.

संवाद की कमी से बढ़ रहा है तनाव

यह घटना किसान और प्रशासन के बीच बढ़ते 'विश्वास के संकट' को दर्शाती है. जहां प्रशासन कानूनी कार्रवाई कर व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं ग्रामीण समुदाय का मानना है कि उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ किसानों के साथ सकारात्मक संवाद और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान ही इस तनाव को कम कर सकता है.