यूपी पुलिस भर्ती: 'पद बढ़ाओ, स्कोरकार्ड दो'... अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, रिक्त पदों को भरने और वेटिंग लिस्ट की उठी मांग

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती 2025 में पद वृद्धि और स्कोरकार्ड जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने आंदोलन तेज कर दिया है. युवाओं ने रिक्त पदों को भरने और वेटिंग लिस्ट की मांग की है.

यूपी तक

• 04:45 PM • 08 Apr 2026

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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती 2025 को लेकर राज्य के लाखों युवाओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. 4543 पदों पर जारी इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का तर्क है कि पिछले पांच वर्षों में पदों की संख्या लगभग आधी हो गई है, जबकि आवेदकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अभ्यर्थी एकजुट होकर पद वृद्धि और स्कोरकार्ड जारी करने की मांग कर रहे हैं.

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9534 से घटकर 4543 पदों की संख्या पर सवाल

अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछली भर्तियों में पदों की संख्या 9534 थी जो इस बार घटकर मात्र 4543 रह गई है. युवाओं के अनुसार, पुलिस विभाग में हजारों पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें इसी भर्ती प्रक्रिया के दौरान जोड़कर भरा जा सकता है. अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदेश के सांसदों, विधायकों और यहाँ तक कि उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) तक ज्ञापन पहुंचाए हैं.

पारदर्शिता के लिए स्कोरकार्ड की मांग

इस आंदोलन की एक मुख्य मांग यह भी है कि भर्ती बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए सभी सफल और असफल उम्मीदवारों का व्यक्तिगत स्कोरकार्ड जारी करे. अभ्यर्थियों का मानना है कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और हर छात्र को उसकी स्थिति का सही अंदाजा हो सकेगा. प्राइवेट टीचर्स और विशेषज्ञों ने भी छात्रों की इस मांग का समर्थन किया है.

वेटिंग लिस्ट और रिजर्व लिस्ट का मुद्दा

भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाने के लिए अभ्यर्थियों ने मांग की है कि अंतिम चयन के बाद एक वेटिंग लिस्ट जारी की जाए. अक्सर देखा जाता है कि कई उम्मीदवार चयन के बाद ज्वॉइन नहीं करते, जिससे पद खाली रह जाते हैं. युवाओं का कहना है कि इन खाली पदों को रिजर्व लिस्ट से भरा जाना चाहिए ताकि योग्य छात्रों को अवसर मिल सके और पद बर्बाद न हों.

सोशल मीडिया पर डिजिटल युद्ध

अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए युवाओं ने सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान छेड़ा हुआ है. लाखों की संख्या में ट्वीट और पोस्ट के जरिए शासन को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह करोड़ों युवाओं के भविष्य और मेहनत का सवाल है. अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज करेंगे.