मेरठ के शास्त्री नगर का प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट, जो कभी शहर की व्यावसायिक धड़कन हुआ करता था, आज सन्नाटे और खौफ के साये में है. सीलिंग की इस कार्रवाई ने यहां के परिवारों को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है. सबसे बुरा असर उन महिलाओं पर पड़ा है, जो अपने छोटे-बड़े व्यापार के जरिए घर की रीढ़ बनी हुई थीं. आज उनके सामने सवाल केवल व्यापार का नहीं, बल्कि परिवार के अस्तित्व का है.
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सीलिंग की जद में केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि यहां संचालित होने वाले नर्सिंग होम और स्कूल भी आ गए हैं. इस वजह से न केवल व्यापारियों की आय बंद हुई है, बल्कि बच्चों की शिक्षा पर भी ताला लग गया है. कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं क्योंकि जिन संस्थानों में उन्होंने भारी-भरकम फीस जमा की थी, उन्हें ही सील कर दिया गया है. बीमारों के लिए नजदीकी इलाज का सहारा (नर्सिंग होम) भी अब खत्म हो चुका है.
उजड़ने का सिलसिला- 'मेहनत की कमाई धूल में मिली'
पीड़ित परिवारों की दास्तां दिल दहला देने वाली है. कई व्यापारियों ने बताया कि उनकी मूल दुकानों को पहले ही तोड़ दिया गया था. किसी तरह हिम्मत जुटाकर उन्होंने दूसरे प्लॉट किराए पर लिए और फिर से काम शुरू करने की कोशिश की, लेकिन सरकारी हथौड़े ने उन्हें वहां से भी उजाड़ दिया. व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की जो पूंजी निवेश की थी, वह प्रशासन की इस कार्रवाई में चंद मिनटों में खाक हो गई.
गहराता आक्रोश और भविष्य की अनिश्चितता
जैसे-जैसे सीलिंग का दायरा बढ़ रहा है, शास्त्री नगर के परिवारों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है. लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से यहाँ काम कर रहे थे और टैक्स भी भर रहे थे, फिर अचानक उन्हें 'अवैध' बताकर बेघर क्यों किया जा रहा है? रोजी-रोटी का संकट अब एक मानवीय आपदा का रूप ले चुका है. परिवारों के पास न तो कोई वैकल्पिक योजना है और न ही प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत का प्रस्ताव मिला है.
9 अप्रैल की सुनवाई पर टिकीं अंतिम सांसें
फिलहाल, इन परिवारों का भविष्य सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिका है. सरकारी और न्यायिक कार्रवाई के इस भंवर में फंसे लोग अब केवल चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं. आने वाले वक्त में यह साफ होगा कि क्या सरकार इन परिवारों के पुनर्वास के लिए कोई रास्ता निकालेगी या शास्त्री नगर की यह 'बर्बादी' मेरठ के इतिहास का एक काला अध्याय बनकर रह जाएगी.
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