पीछे से आई कार और रौंद दिया... आगरा में असगर अली की संदिग्ध मौत का फुटेज वायरल, बेटों ने कहा ये मर्डर मिस्ट्री है

आगरा के ट्रांसपोर्टर असगर अली की संदिग्ध मौत मामले में परिजनों ने GST अधिकारी निवेदिता सिंह पर हत्या का आरोप लगाया है. सीसीटीवी फुटेज में कार द्वारा पीछे से टक्कर मारते हुए देखा गया है.

यूपी तक

• 04:07 PM • 08 Apr 2026

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आगरा के ट्रांसपोर्ट कारोबारी असगर अली की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है. 3 अप्रैल की रात हुई इस घटना को पुलिस ने शुरू में एक सड़क हादसा करार दिया था, लेकिन अब सामने आए एक सनसनीखेज सीसीटीवी फुटेज ने पुलिसिया थ्योरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फुटेज में दिख रहा है कि असगर अली सड़क पर पैदल चल रहे हैं और पीछे से एक कार बिना हॉर्न दिए या ब्रेक लगाए उन्हें टक्कर मारकर निकल जाती है.

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परिजनों का आरोप- 'यह हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या है'

असगर अली के बेटों, अब्दुल अली और सजमन अली ने यूपी Tak से खास बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है. बेटों का दावा है कि उनके पिता को पिछले काफी समय से अलग-अलग नंबरों से धमकियां मिल रही थीं. उनसे कहा जा रहा था कि यदि उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ किए गए केस वापस नहीं लिए, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.

GST अधिकारियों पर उठी उंगली

परिजनों का सीधा आरोप जीएसटी विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर निवेदिता सिंह, उनके पति (जो नगर निगम में अधिकारी हैं) और उनके सहयोगियों पर है. परिजनों के मुताबिक, नवंबर में उनकी गाड़ियां पकड़ी गई थीं, जिसके एवज में करीब 4.5 लाख रुपये लिए गए, लेकिन रसीद केवल 36,000 रुपये की दी गई. असगर अली ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ उच्च अधिकारियों (प्रमुख सचिव एम. देवराज) और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आवाज उठाई थी. बेटों का कहना है कि निवेदिता सिंह ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और उनके पिता की गाड़ियों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा था.

घटना वाली रात का रहस्य

बेटों ने बताया कि घटना वाली रात भी उनकी गाड़ी पकड़ी गई थी. असगर अली ने फोन पर बताया था कि वे गाड़ी के साथ आ रहे हैं, लेकिन उन्हें वहीं रोक लिया गया और ड्राइवर को गाड़ी के साथ भेज दिया गया. इसके कुछ देर बाद ही उनकी लाश 'मल्लिका चबूतरा' के पास मिली. परिजनों का सवाल है कि जब ड्राइवर को भेज दिया गया, तो उनके पिता को वहाँ अकेले क्यों रोका गया?

'तहरीर बदलने का दबाव'

मृतक के बेटों का आरोप है कि शाहगंज थाना पुलिस उन पर तहरीर बदलने और अधिकारियों के नाम हटाने का दबाव बना रही है. पुलिस ने 24 घंटे में मुजरिम पकड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. वहीं, इस मामले पर डीसीपी सिटी अली अब्बास का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में प्रथम दृष्टया यह सड़क हादसा ही लग रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि परिजन दोबारा तहरीर देते हैं, तो मुकदमा दर्ज कर गहन जांच की जाएगी.