शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद द्वारा की जा रही सीलिंग की कार्रवाई ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 44 बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को सील करने की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, व्यापारियों का गुस्सा फूट रहा है. व्यापारियों का सीधा आरोप है कि प्रशासन ने कोर्ट में उनका पक्ष ठीक से नहीं रखा, जिसकी सजा अब हजारों लोग भुगत रहे हैं.
ADVERTISEMENT
70 करोड़ जमा, फिर भी अन्याय: व्यापारियों का बड़ा दावा
बाजार के व्यापारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने दुकानों को वैध कराने (Regularization) के लिए आवास विकास परिषद में लगभग 70 करोड़ रुपये जमा किए थे. उनका आरोप है कि मोटी रकम वसूलने के बावजूद परिषद ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह तथ्य पेश नहीं किया कि व्यापारियों ने अपनी ओर से प्रक्रिया पूरी कर दी थी. इसी 'कम्युनिकेशन गैप' की वजह से आज उन्हें अवैध बताकर बाहर किया जा रहा है.
24 घंटे का अल्टीमेटम और 'गोल्ड लॉकर्स' का संकट
सीलिंग की इस कार्रवाई से केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि बैंक, स्कूल और नर्सिंग होम भी प्रभावित हुए हैं. व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन ने सामान हटाने के लिए मात्र 24 घंटे का समय दिया, जो किसी भी चलते हुए व्यापार के लिए नाकाफी है. सबसे बड़ी चिंता बैंकों को लेकर है; कई बैंकों में लोगों की एफडी (FD) और गोल्ड लॉकर्स में कीमती सामान जमा है. अचानक सीलिंग होने से लोग अपना सोना और जरूरी कागजात निकालने के लिए दर-दर भटक रहे हैं.
रोजी-रोटी का संकट और आजीविका की चिंता
सेंट्रल मार्केट की बंदी से केवल मालिक ही नहीं, बल्कि वहाँ काम करने वाले हजारों कर्मचारी और उनके परिवार भी संकट में हैं. कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह से इन्हीं दुकानों पर निर्भर थी. व्यापारियों का कहना है कि यह केवल ईंट-पत्थरों की कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह मेरठ की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार है.
9 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल, पूरे बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है. व्यापारियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें कम से कम अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए. अब सबकी नजरें 9 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ तय होगा कि मेरठ का यह सबसे बड़ा बाजार बचेगा या सीलिंग की यह प्रक्रिया जारी रहेगी.
ADVERTISEMENT









