उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज-2 इलाके में हजारों मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी श्रमिक वेतन वृद्धि, बोनस और न्यायसंगत अवकाश जैसी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए, जिससे घंटों यातायात प्रभावित रहा. प्रशासन के हस्तक्षेप और ठोस आश्वासन के बाद ही मजदूरों ने रास्ता साफ किया.
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महंगाई की मार और वेतन बढ़ाने की पुकार
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि वर्तमान वेतन में परिवार का गुजारा करना नामुमकिन हो गया है. उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- वेतन वृद्धि: अकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹18,000 से ₹20,000 सुनिश्चित किया जाए.
- हरियाणा मॉडल: मजदूरों ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश में भी हरियाणा की तर्ज पर न्यूनतम वेतन नीति लागू की जाए.
- अधिकारों की सुरक्षा: फैक्ट्रियों में बेहतर कार्य परिस्थितियां, समय पर बोनस और कानूनी रूप से निर्धारित अवकाश मिलना चाहिए.
प्रशासन का रुख और डीएम का सख्त निर्देश
हंगामा बढ़ता देख जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला.
- नौकरी की सुरक्षा: डीएम ने स्पष्ट रूप से कारखाना मालिकों को निर्देश दिए हैं कि मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले किसी भी मजदूर की नौकरी जोखिम में नहीं आनी चाहिए.
- सख्त निगरानी: प्रशासन ने भरोसा दिया है कि श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाओं, जैसे अवकाश और बोनस, की सख्ती से पालना कराई जाएगी.
पारदर्शी श्रम कानूनों की तैयारी में सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में नए श्रम कानूनों को पारदर्शी तरीके से लागू करने की दिशा में काम कर रही है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को मजबूत करना और उन्हें बेहतर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है. प्रशासन ने मजदूरों को आश्वस्त किया है कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द ही संवाद के माध्यम से निकाल लिया जाएगा.
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