नोएडा में औद्योगिक इकाइयों के बाहर मजदूरों का आंदोलन अब बेहद उग्र हो गया है. महंगाई के इस दौर में पुराने वेतन पर काम करने को मजबूर कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन मजदूरों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है.
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महंगाई की मार और 'स्थिर' वेतन का दर्द
प्रदर्शनकारी मजदूरों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से उनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. उनका कहना है कि जहां एक ओर कमरे का किराया, गैस और राशन की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनियां उनके जीवन स्तर और बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दे रही हैं. इसी बेरुखी के चलते मजदूरों का सब्र टूट गया और वे फैक्ट्रियों से निकलकर सड़कों पर जमा हो गए.
सेक्टर-62 और फेज-2 में तनाव, पुलिस का लाठीचार्ज
आंदोलन का सबसे ज्यादा असर सेक्टर-62 और फेज-2 के इलाकों में देखने को मिला. यहाँ बड़ी संख्या में जुटे मजदूरों को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) भी करना पड़ा.
- प्रमुख मांगें: मजदूरों की स्पष्ट मांग है कि उनका न्यूनतम वेतन 13,000 से बढ़ाकर 20,000 किया जाए.
- ओवरटाइम का मुद्दा: श्रमिक ओवरटाइम के उचित और समयबद्ध भुगतान की भी मांग कर रहे हैं.
आश्वासन के बावजूद आंदोलन जारी
प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मजदूरों के प्रतिनिधियों से बात की और उन्हें वेतन वृद्धि का आश्वासन दिया है. हालांकि, प्रदर्शनकारी अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि जब तक ठोस आदेश जारी नहीं होते, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है.
श्रमिक हितों और सुरक्षित भविष्य की मांग
यह प्रदर्शन केवल वेतन तक सीमित नहीं है. मजदूर नए श्रमिक कानूनों को लागू करने और कार्यस्थल पर बेहतर माहौल सुनिश्चित करने की भी मांग कर रहे हैं. कामगारों का मानना है कि यह उनकी गरिमा और जीवन स्तर में सुधार की लड़ाई है, जो मजदूर वर्ग की स्थिति को भविष्य में मजबूत करेगी.
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