उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस और STF को एक बड़ी कामयाबी मिली है. नोएडा में हुए हिंसक वर्कर प्रदर्शनों के पीछे की मास्टरमाइंड साजिश का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से दबोच लिया है. आदित्य पर 100000 का इनाम घोषित था और वह काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था.
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व्हाट्सऐप ग्रुप्स और वामपंथी संगठनों से क्या है कनेक्शन?
जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है. पुलिस के मुताबिक, आदित्य आनंद के तार एक उग्र वामपंथी संगठन से जुड़े हैं. आरोप है कि वह व्हाट्सऐप पर गुप्त ग्रुप्स बनाकर हजारों वर्कर्स को जोड़ता था और उन्हें हिंसक प्रदर्शन के लिए भड़काता था. इन ग्रुप्स के जरिए ही हिंसा की पूरी रणनीति तैयार की जाती थी. आरोपी के खिलाफ पहले से ही गैर-जमानती वारंट जारी था, लेकिन वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था.
जब नोएडा की सड़कों पर हुआ था बवाल
बता दें कि नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का यह प्रदर्शन वेतन वृद्धि और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांगों को लेकर शुरू हुआ था. लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस बल पर पथराव किया. पुलिस का मानना है कि इस सामान्य मांग वाले प्रदर्शन को हिंसा की ओर मोड़ने में आदित्य आनंद की भूमिका सबसे मुख्य थी.
हिंसक झड़पों और व्यापक विरोध के बाद, सरकार ने वर्कर्स के हित में बड़ा फैसला लेते हुए न्यूनतम वेतन में 21% की बढ़ोतरी की घोषणा की है. फिलहाल नोएडा में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन पुलिस की जांच अभी थमी नहीं है. आदित्य आनंद की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उन अन्य चेहरों की तलाश कर रही है जो पर्दे के पीछे से इस साजिश का हिस्सा थे.
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