प्रशासन के आश्वासन के बाद भी नोएडा में उग्र क्यों हुए मजदूर और फूंक दी गाड़ियां, पूरा मामला समझिए

नोएडा में वेतन वृद्धि और कामकाज में सुधार की मांग को लेकर निजी कंपनी के कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने सेक्टर-84 में गाड़ियां फूंकी और पुलिस वाहन को पलट दिया. प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए बल प्रयोग किया है.

Noida Protest

भूपेंद्र चौधरी

13 Apr 2026 (अपडेटेड: 13 Apr 2026, 12:06 PM)

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नोएडा में निजी कंपनियों के कर्मचारियों का आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है. सैलरी हाइक समेत अन्य मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से चल रहा यह विरोध प्रदर्शन सोमवार सुबह उग्र हो गया. सेक्टर-60, 62 और फेज-2 इलाकों में प्रदर्शनकारियों के बढ़ते गुस्से और सड़कों पर हुई हिंसा के कारण नोएडा के कई इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया.

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आपको बता दें कि सोमवार सुबह जब प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे, तो सेक्टर-60 और 62 के आसपास के प्रमुख रास्ते पूरी तरह ठप हो गए. सुबह के समय दफ्तर जाने वाले लोगों को इस भारी जाम के कारण घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी. देखते ही देखते विरोध का यह स्वर फेज-2 इलाके तक फैल गया, जहां स्थिति सबसे ज्यादा खराब नजर आई.

 

2 गाड़ियां फूंक दी गईं

प्रदर्शन के दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और नोएडा के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की खबरें सामने आईं. सेक्टर-84 में प्रदर्शनकारियों ने दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन को भी नहीं छोड़ा

उग्र भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक पुलिस वाहन को भी निशाना बनाया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर उसे बीच सड़क पर पलट दिया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

मदरसन कंपनी के बाहर कर्मचारियों का सबसे ज्यादा हंगामा

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र मदरसन कंपनी के बाहर का क्षेत्र रहा. यहां बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर मनमानी, वेतन में देरी और काम के माहौल में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आज की कमरतोड़ महंगाई में मौजूदा वेतन में गुजारा करना असंभव हो गया है, इसलिए वे लंबे समय से सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

प्रशासन के आश्वासन के बाद भी क्यों भड़का गुस्सा?

हैरानी की बात यह है कि इस हिंसक घटना से ठीक एक दिन पहले जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण और पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे: 

  1. गौतम बुद्ध नगर के श्रमिकों को अब ओवरटाइम के बदले दोगुना पैसा देने का निर्देश दिया गया था.
  2. यह सुनिश्चित किया गया था कि बोनस और सैलरी बिना किसी देरी के सीधे बैंक खातों में भेजी जाए.
  3. अधिकारियों ने सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था.

इसके बावजूद, सोमवार सुबह कर्मचारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ और उन्होंने सड़कों पर उतरकर आंदोलन को उग्र रूप दे दिया.

जब भीड़ को समझाना मुश्किल हो गया और हिंसा बढ़ने लगी, तो भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया. प्रशासन की इस सख्ती के बाद कुछ इलाकों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में अभी भी तनाव का माहौल व्याप्त है.